अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक,56,प्रज्ञा रॉय ,आजमगढ़
*👩🏻🏫अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक*
*मिशन शिक्षण संवाद परिवार की बहनों की संघर्ष और सफ़लता की कहानी*
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2321606221450295&id=1598220847122173
*👩👩👧👧महिला सशक्तीकरण- 56*
(दिनाँक- 28 अप्रैल 2019)
नाम:-प्रज्ञा रॉय
पद-सहायक अध्यापक
विद्यालय-प्राथमिक विद्यालय भरौली 2 ,अजमतगढ़,आजमगढ़
*सफलता एवं संघर्ष की कहानी*
👉
_रोशनी करने का अंदाज़ बदलना है_
_चिराग नही जलाने है , चिराग बनकर जलना है ...._
शैक्षिक जीवन से ही मेरी इच्छा थी कि मैं शिक्षक बनूँ और शिक्षा को समाज के मुख्यधारा से वंचित लोंगो के मध्य पहुंचाऊं । मेरी यह इच्छा 9 नवंबर 2015 को पूर्ण हुई जब मैंने कुशीनगर के एक मुसहर बस्ती में बंद विद्यालय का कार्यभार ग्रहण किया । प्राथमिक विद्यालय मैनपुर कोट में प्रभारी प्रधानाध्यापिका के रूप में मेरी मुख्य चुनौती यह थी कि कैसे विद्यालय की शुरुआत किया जाए । मुसहर समुदाय के बीच कार्य करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी परंतु यह कार्यस्थल मैंने स्वयं चुना था इसलिए मेरी कार्ययोजना तैयार थी ।
मेरा कार्य सरल नही था । सीपी , घोंघा और चूहों के शिकार करने वाले बच्चों को नदियों तालाबों खेतों और सुदूर ईंट भट्ठों से विद्यालय तक लाना और उनको शिक्षा से जोड़ना अत्यंत श्रमसाध्य कार्य था परंतु जहां चाह वहां राह सिद्धान्त पर चलते हुए मैने सर्वप्रथम मुसहर बस्तियों में ही स्कूल चलाना शुरू किया । सर्वप्रथम अभिभावकों को स्वास्थ , स्वच्छता और फिर शिक्षा के प्रति जागरूक किया जिससे मुझे उनका विश्वास प्राप्त होने लगा । फिर मैंने विद्यालय का कायाकल्प करना शुरू किया अपने बच्चों को सरकारी स्कूल्स की रंगहीन दुनिया से निकालकर , एक खूबसूरत रंगीन स्कूल की दुनिया के सपने को साकार किया । हमारे प्रयासों के फलस्वरूप 200 से अधिक बच्चों का नामांकन और उपस्थिति विद्यालय में सुनिश्चित हुई साथ ही वर्तमान मुख्यमंत्री जी का विद्यालय में आगमन और आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ ।
वर्तमान समय में जुलाई 2018 से मैं अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण के द्वारा अपने गृह जनपद आजमगढ़ में कार्यरत हूँ । यहां भी मेरा विद्यालय एकल था और दुर्व्यवस्थाओं से जूझ रहा था । अब यहां भी धीरे धीरे काम करना शुरू कर दिया है । यहां की परिस्थियां अलग हैं । मिलीजुली आबादी में हरिजन बाहुल्यता वाले क्षेत्र पर मैंने विशेष ध्यान देना प्रारंभ किया है । यहां पर मेरा शिक्षण कार्य मुख्यतः आई 0 सी0 टी 0 पर आधारित है । शिक्षकों और अधिकांश अभिभावकों के पास स्मार्टफ़ोन है मेरे बच्चे अब खुद ही बेसिक की किताबों के क्यू 0 आर0 कोड को स्कैन करके दीक्षा एप्प से पाठ्य सामग्री प्राप्त कर लेते हैं । शिक्षकों और अभिभावकों को भी समय समय पर विभिन्न एडुकेशन एप्प पर काम करना सिखाती हूँ । अभिभावकों को विद्यालय से जोड़ने के लिए हमने साबुन बैंक की स्थापना की है जिसका स्लोगन है साबुन तो एक बहाना है , विद्यालय मिलने आना है । इसके साथ ही भविष्य के लिए अनेकों कार्ययोजनायें तैयार की है जिसपर कियान्वयन होना बाकी है ।
_✏संकलन_
*📝टीम मिशन शिक्षण संवाद।*
Comments
Post a Comment