कुछ करके दिखलाऊँ मैं
पापा कहते बनूँ डॉक्टर
करूँ मरीज़ की सेवा,
मम्मी कहती बन इंजीनियर
खूब नाम कमाऊँ मैं
भाई कहता सबसे अच्छा,
सीखू मैं कंप्यूटर
कम्प्यूटर में जॉब हैं ढेरों
पैसा खूब कमाऊँ मैं,
चाचा कहते बनकर टीचर
बच्चो का भविष्य बनाऊँ मैं
दीदी कहतीं बनकर डीएम
सब पर रौब दिखाऊ मैं
दादा कहते फौज में जाकर
देश की सेवा करना
अपने लिए तो सब जीते हैं
तुम देश के लिए जीना,
दादी कहतीं लाड़ जताकर
मुझसे दूर न जाना
घर में रहकर तुम
कोई उद्योग लगाना।
समझ न पाए कोई भी
मेरे मन की अभिलाषा
सबकी अपनी इच्छाएँ हैं
सबकी ही है आशा
पर मेरे इस मन की उलझन
कोई समझ न पाता।
कोई गरीब जब मजबूरी में
अपनी जान गंवाए
तो सोचूँ मैं बनूँ डॉक्टर
सबकी जान बचाऊँ
नया पुल कोई जब गिरे झटके से
सोचूँ बनूँ इंजीनियर
ईमानदारी से काम करूँ और
अपना फर्ज निभाऊँ मैं
कार्टून फ़िल्म भाती है मुझको
भाता है एनीमेशन, मन में आता
बन जाऊँ मैं कंप्यूटर इंजीनिअर
जब देखूँ बच्चों को मज़दूरी करते
मन मे आये बन शिक्षक
उन बच्चों को उनका हक दिलवाऊँ मैं
देश की रक्षा की खातिर
जब सैनिक कोई शहीद हो जाए
लगता है बंदूक उठा
दुश्मन को मार गिराऊँ मैं
अपने देश की खातिर फिर
अपनी जान गंवाऊँ मैं
चाहें कुछ भी बन जाऊँ पर
एक बात है बहुत जरूरी
एक सच्चा इंसान बनूँ और
जीवन सफल बनाऊँ मैं
जन्म दिया उस ईश्वर ने तो
कुछ करके दिखलाऊँ मैं
रचयिता
डॉक्टर नीतू शुक्ला,
प्रधान शिक्षक,
मॉडल प्राइमरी स्कूल बेथर 1,
विकास खण्ड-सिकन्दर कर्ण,
जनपद-उन्नाव।
करूँ मरीज़ की सेवा,
मम्मी कहती बन इंजीनियर
खूब नाम कमाऊँ मैं
भाई कहता सबसे अच्छा,
सीखू मैं कंप्यूटर
कम्प्यूटर में जॉब हैं ढेरों
पैसा खूब कमाऊँ मैं,
चाचा कहते बनकर टीचर
बच्चो का भविष्य बनाऊँ मैं
दीदी कहतीं बनकर डीएम
सब पर रौब दिखाऊ मैं
दादा कहते फौज में जाकर
देश की सेवा करना
अपने लिए तो सब जीते हैं
तुम देश के लिए जीना,
दादी कहतीं लाड़ जताकर
मुझसे दूर न जाना
घर में रहकर तुम
कोई उद्योग लगाना।
समझ न पाए कोई भी
मेरे मन की अभिलाषा
सबकी अपनी इच्छाएँ हैं
सबकी ही है आशा
पर मेरे इस मन की उलझन
कोई समझ न पाता।
कोई गरीब जब मजबूरी में
अपनी जान गंवाए
तो सोचूँ मैं बनूँ डॉक्टर
सबकी जान बचाऊँ
नया पुल कोई जब गिरे झटके से
सोचूँ बनूँ इंजीनियर
ईमानदारी से काम करूँ और
अपना फर्ज निभाऊँ मैं
कार्टून फ़िल्म भाती है मुझको
भाता है एनीमेशन, मन में आता
बन जाऊँ मैं कंप्यूटर इंजीनिअर
जब देखूँ बच्चों को मज़दूरी करते
मन मे आये बन शिक्षक
उन बच्चों को उनका हक दिलवाऊँ मैं
देश की रक्षा की खातिर
जब सैनिक कोई शहीद हो जाए
लगता है बंदूक उठा
दुश्मन को मार गिराऊँ मैं
अपने देश की खातिर फिर
अपनी जान गंवाऊँ मैं
चाहें कुछ भी बन जाऊँ पर
एक बात है बहुत जरूरी
एक सच्चा इंसान बनूँ और
जीवन सफल बनाऊँ मैं
जन्म दिया उस ईश्वर ने तो
कुछ करके दिखलाऊँ मैं
रचयिता
डॉक्टर नीतू शुक्ला,
प्रधान शिक्षक,
मॉडल प्राइमरी स्कूल बेथर 1,
विकास खण्ड-सिकन्दर कर्ण,
जनपद-उन्नाव।

Nyc
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