यह धरा हमारी है
यह धरा हमारी है
हम सबको यह प्यारी है,
संसाधनों से भरपूर
सभी ग्रहों से न्यारी है...
यह धरा हमारी है.....
वृक्षों से सजी यह धरती
कितनी सुंदर लगती है,
इन्हें काटना मानव की
सबसे बड़ी गलती है,
न करो तुम ऐसा कृत्य
कलंक बहुत यह भारी है...
यह धरा हमारी है....
जल जीवन है सबने माना
फिर क्यों इसे व्यर्थ बहाते हो,
इसे बचाओ इसके बिना
नहीं खिल सकती कोई क्यारी है....
यह धरा हमारी है....
दूषित वायु ढहा रही प्रकोप
प्रचण्ड ताप से धधक रही धरती,
क्षीण हो रही ओजोन की छतरी
प्राण वायु को शुद्ध रखना,
यह हम सभी की जिम्मेवारी है....
यह धरा हमारी है....
हम सबको यह प्यारी है,
संसाधनों से भरपूर
सभी ग्रहों से न्यारी है...
यह धरा हमारी है.....
वृक्षों से सजी यह धरती
कितनी सुंदर लगती है,
इन्हें काटना मानव की
सबसे बड़ी गलती है,
न करो तुम ऐसा कृत्य
कलंक बहुत यह भारी है...
यह धरा हमारी है....
जल जीवन है सबने माना
फिर क्यों इसे व्यर्थ बहाते हो,
इसे बचाओ इसके बिना
नहीं खिल सकती कोई क्यारी है....
यह धरा हमारी है....
दूषित वायु ढहा रही प्रकोप
प्रचण्ड ताप से धधक रही धरती,
क्षीण हो रही ओजोन की छतरी
प्राण वायु को शुद्ध रखना,
यह हम सभी की जिम्मेवारी है....
यह धरा हमारी है....
रचयिता
फरज़ाना बानो,
सहायक अध्यापक विज्ञान,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय नेवादा,
विकास खण्ड-शाहगंज,
जनपद-जौनपुर।

बहुत सुंदर कविता मैंम
ReplyDelete