महाराणा प्रताप

शौर्य, पराक्रमी, देशभक्त महाराणा प्रताप के जीवन के कुछ अंश

राणाप्रताप का जन्म हुआ,
9 मई 1540 में।
राजस्थान के कुम्भलगढ़ में,
मेवाड़ मुकुट मणि जन्म लिए।।

राणा उदयसिंह, रानी जैवन्ताबाई
के बहादुर पुत्र थे वो।
स्वाभिमानी धार्मिक पराक्रमी,
खेलकूद में निपुण थे वो।।

युद्ध कौशली, राजनीतिज्ञ,
आदर्श संगठनकर्ता थे।
देश और धर्म की ख़ातिर,
खुद बलिदान हो सकते थे।।

राणा प्रताप के काल में ही,
अकबर का दिल्ली में शासन था।
हिन्दू राजाओं की शक्ति को,
नियंत्रण में लेने का मन था।।

1 मार्च 1573 का,
वो पावन सा क्षण था।
जब कीर्ति शौर्य का पुण्य प्रतीक,
राणा सिंहासनासीन हुआ।।

राणा प्रताप का अश्व था वो,
उनके समान ही शूरवीर।
नील अफगानी चेतक था,
राणा हृदय को बहुत प्रिय।।

हल्दी घाटी के युद्ध में चेतक,
अरि गजमस्तक तक उछल गया।
तब राणा ने अरि मानसिंह,
के तन पर ज़ोरों का वार किया।।

राणा को पीठ पे बैठाकर,
26 फ़ीट नाला लांघ गया।
प्रताप संग युद्ध में घायल,
चेतक वीरगति को प्राप्त हुआ।।

चित्तौड़ का विध्वंस देख,
राणा सर्वस्व त्याग दिए।
चित्तौड़ छोड़, परिवार सहित,
वन की ओर प्रस्थान किये।।

सोने चांदी के पात्र छोड़,
पत्तों पर भोजनपान किये।
घास की रोटी, निर्झर जल पर,
जीवन यापन को बाध्य हुए।।

अरावली की गुफाओं में,
अब उनका आवास हो गया।
देशभक्ति का गौरव सूर्य,
संकट में भी यूँ अडिग रहा।।

राणा जीवन का अवसान हुआ,
29 जनवरी 1597 को।
प्रताप की वीरता और गौरव
जग में याद रहे सबको।।

राणा की वीरता और महात्म्य,
जगत भर विराजमान रहे।
जब तक सूर्य में चमक रहे,
तब तक प्रताप का नाम रहे।।

रचयिता
पूजा सचान,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मसेनी(बालक) अंग्रेजी माध्यम,
विकास खण्ड-बढ़पुर,
जनपद-फर्रुखाबाद।

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