अंश बटा हर

अंश बटा हर। 
विद्यालय अपना घर।
विषम भिन्न में अंश बड़ा,
सम भिन्न में हर।
विद्यालय को ऐसे सजाओ, 
जैसे सजाते घर।
दो बटा तीन  पानी, 
एक बटा तीन पे हम।
दोनों मिलके पृथ्वी बनी,
जिसपे रहते तुम और हम।

रचयिता       
जय श्री सैनी 'सायक',
प्राथमिक विद्यालय कुकहा रामपुर,
विकास खण्ड-सिंहपुर, 
जनपद-अमेठी।

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