मैं भी छू सकती हूँ आकाश, मौके की है मुझे तलाश
आज पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। जो रोज महिलाओं को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देता है वो भी महिलाओं को सशक्त करने की बात कहते मिलेगा। सिर्फ कह देने भर से हम महिलाएँ सशक्त तो नहीं हो सकता। बहुत से लोगों को यह भी कहते सुना गया है कि एक महिला ही दूसरी महिला की सबसे बड़ी दुश्मन होती है। पर मुझे नहीं लगता यह तो मानव स्वभाव है स्वयं की प्रभुता को सिद्ध करने के लिये प्रत्येक व्यक्ति अपने आप से कमजोर को कुचलकर आगे बढ़ने का प्रयास करता है फिर वो कोई महिला हो या पुरुष मायने नहीं रखता।
रही बात महिलाओं के सशक्त होने या दुर्बल होने की तो हम जब यह स्लोगन प्रयोग करते हैं कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' तो कहीं न कहीं हम खुद ही मान लेते हैं कि बेटियाँ कमजोर हैं। यदि इसकी जगह हम यह कहें कि बेटी को सशक्त बनाओ उन्हें इतना मजबूत बनाएँ की हर चुनौतियों का सामना स्वयं से करें। उन्हें किसी के भी सहारे की आवश्यकता न हो वो खुद तो मजबूत हों ही औरों को भी आगे बढ़ने में मदद करें।
इस पुरुष प्रधान समाज में हम महिलाओं को अपनी अस्मिता की रक्षा करते हुए आगे बढ़ना है और समाज को भी आगे बढ़ाना है। कहते हैं बेटियाँ दो कुलों को शिक्षित करती हैं यह कहीं न कहीं सही भी है, पर हम महिलाओं का अपना घर भी नहीं होता बचपन से यही कहा जाता है तुम तो पराया धन हो एक दिन तुम्हे यहाँ से जाना है। चाहकर भी हमें वो अधिकार नहीं प्राप्त होते जो एक बेटे को या पुरूष को मिलते हैं।
बड़े होने पर शादी के बाद ससुराल में भी यही कहा जाता है तुम तो परायी हो वस्तुतः हम स्त्रियों का अपना स्थान कहाँ है कोई यह तो स्पष्ट करे तो शायद कोई बात बने।
आइए हम सब एक-दूसरे से वादा करें कि खुद को इतना सशक्त बनाएँगे की खुद तो आगे बढ़ेंगे ही दूसरों को भी बढ़ने में सहायता करेंगे।
ज्योति कुमारी,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोइलरा,
विकास क्षेत्र-औराई,
जनपद-भदोही।

स्त्री प्रकृति का दूसरा रुप है ।भगवान् जी ने जब इस संसार की रचना की तो स्त्री के बिना इस दुनिया के अधूरेपन को मिटाने के लिए उसको कुछ अतिरिक्त शक्तियां प्रदान की ।उसको हर दुख सहन करने की शक्ति प्रदान की।मातृत्व शक्ति प्रदान की।इस लिए पुरुषों को स्त्रियों का सम्मान करना चाहिए ।मातृत्व शक्ति को शत शत नमन ।
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