संवेदनशील लौहमहिला
(महिला दिवस पर प्रेरक सत्य-घटना)
तारीख : 22 जनवरी 2015
स्थान : DIET बरेली
72825 के प्रथम चरण की काउन्सलिंग में अंतिम दिन सभी वर्ग/श्रेणियों के लिए खोल दिया गया था। बरेली DIET के बारे में प्रचारित था कि 5 बजे के बाद काउन्सलिंग बन्द हो जाती है। शाम के 5 बजने वाले थे और हजारों अभ्यर्थी शेष थे और दूर जिलों से काउन्सलिंग कराकर अब भी आ रहे थे।
कुछ 'जिम्मेदारों' को खबर लगती है कि अभ्यर्थी देर तक काउन्सलिंग का दबाव बनाने के लिए उपद्रव की योजना बना रहे हैं। वे 'जिम्मेदार' बहाने से निकल जाते हैं, घर पहुँचकर अपना मोबाइल भी switch off कर देते हैं ताकि कोई मदद की गुहार भी न कर सके।
बाद में औरों को भी खबर लगती है तो काउन्सलिंग की इंचार्ज 'लौहमहिला' सबको एक-एक करके चुपचाप निकलने को कहती हैं। अंत में काउन्सलिंग में कार्यरत लोगों में केवल दो मैडम शेष।
वे 'लौहमहिला' दूसरी महिला को भी जबरदस्ती भेज देती हैं और स्वयं अकेली रह जाती हैं।
तभी लगभग 3000 अभ्यर्थी परिसर में घुस आते हैं और 'लौहमहिला' को घेर लेते हैं। जीने, छत, बरामदा अभ्यर्थियों से भर जाते हैं।
नारेबाजी, जबरदस्त दबाव।
लौहमहिला की सुनने को भी कोई तैयार नहीं।
कुछ भी होने की आशंका।
इस बीच चार सिपाही और एक दारोगा भीड़ में मुश्किल से जगह बनाते हुए 'लौहमहिला' तक पहुँचकर उन्हें घेरे में ले लेते हैं। लेकिन अभ्यर्थी लौहमहिला को बाहर निकलने देने को तैयार नहीं।
भावी आशंका को देखकर दारोगा CO को फ़ोन करते हैं।
थोड़ी देर में दो थानों की पुलिस के साथ CO हाजिर।
वे लौहमहिला तक पहुँचकर उन्हें निकलने को कहते हैं।
लौहमहिला द्वारा अभ्यर्थियों के बारे में प्रश्न करने पर CO कहते हैं, "आप निकलिए, इन्हें हम देख लेंगे।" CO की बात का मतलब 'लौहमहिला' समझ जाती हैं।
अब दिखती है लौहमहिला की संवेदनशील आत्मा जो कहती है, "नहीं इन्हें कुछ मत करिएगा। बेचारे दूर-दूर से आये हैं, परिस्थितियों के सताये हैं।"
अंततः कुछ (लाठीचार्ज) न करने के आश्वासन पर परिसर खाली कराया जाता है। हज़ारों लोगों को बाहर आने में ही आधा-पौन घंटा लग जाता है।
निकल जाने की सलाह के बावजूद लौहमहिला अभ्यर्थियों से बात करती हैं और उनका संवेदनशील स्वरूप फिर दिखता है जब वे अभ्यर्थियों से कहती हैं, "आप निराश न हों। मैं आप सबकी फ़ाइल जमा करूँगी और कल हर फ़ाइल की फीडिंग भी होगी। बस थोड़ी व्यवस्था बनायें और 25 स्वयंसेवक कैटेगरी अनुसार files जमा करें और मार्कर से हर फ़ाइल पर cut off लिख दें।"
फिर सुतली आदि का प्रबंध करके उक्त कार्य देर रात तक हुआ।
बाद में सबकी फीडिंग भी हुई जबकि अन्यों द्वारा उन फाइलों पर ध्यान न देने की 'सलाह' भी दी गयी थी। इनमें से अनेक अभ्यर्थियों को बाद में सर्विस भी मिली।
लेकिन मुख्य बात थी :
1. लौहमहिला द्वारा अपनी बजाय शेष साथियों की सुरक्षा को प्राथमिकता
2. भयंकर प्रतिकूलता के मध्य भी धैर्य न खोना
3. खुद पर हमलावर अभ्यर्थियों की सुरक्षा के प्रति भी संवेदनशील दृष्टिकोण रखना
4. अभ्यर्थियों की भावनाओं और भविष्य को दृष्टिगत रखकर उन्हें काउन्सलिंग में मौका देना
और इस प्रकार उस असली नेतृत्व-क्षमता के दर्शन कराना, जिसमें धैर्य, साहस, परहित-चिंतन, संवेदनशीलता, विशाल हृदय और दूरदर्शिता जैसे मानवीय गुणों का दुर्लभ संगम झलकता है।
जानते हैं कौन हैं ये 'संवेदनशील लौहमहिला'?
जी हाँ, हम सबकी आदरणीया और प्रेरक व्यक्तित्व की स्वामिनी श्रीमती शिवानी यादव मैडम (वरिष्ठ प्रवक्ता और DIET Bareilly की पर्याय)
लेखकतारीख : 22 जनवरी 2015
स्थान : DIET बरेली
72825 के प्रथम चरण की काउन्सलिंग में अंतिम दिन सभी वर्ग/श्रेणियों के लिए खोल दिया गया था। बरेली DIET के बारे में प्रचारित था कि 5 बजे के बाद काउन्सलिंग बन्द हो जाती है। शाम के 5 बजने वाले थे और हजारों अभ्यर्थी शेष थे और दूर जिलों से काउन्सलिंग कराकर अब भी आ रहे थे।
कुछ 'जिम्मेदारों' को खबर लगती है कि अभ्यर्थी देर तक काउन्सलिंग का दबाव बनाने के लिए उपद्रव की योजना बना रहे हैं। वे 'जिम्मेदार' बहाने से निकल जाते हैं, घर पहुँचकर अपना मोबाइल भी switch off कर देते हैं ताकि कोई मदद की गुहार भी न कर सके।
बाद में औरों को भी खबर लगती है तो काउन्सलिंग की इंचार्ज 'लौहमहिला' सबको एक-एक करके चुपचाप निकलने को कहती हैं। अंत में काउन्सलिंग में कार्यरत लोगों में केवल दो मैडम शेष।
वे 'लौहमहिला' दूसरी महिला को भी जबरदस्ती भेज देती हैं और स्वयं अकेली रह जाती हैं।
तभी लगभग 3000 अभ्यर्थी परिसर में घुस आते हैं और 'लौहमहिला' को घेर लेते हैं। जीने, छत, बरामदा अभ्यर्थियों से भर जाते हैं।
नारेबाजी, जबरदस्त दबाव।
लौहमहिला की सुनने को भी कोई तैयार नहीं।
कुछ भी होने की आशंका।
इस बीच चार सिपाही और एक दारोगा भीड़ में मुश्किल से जगह बनाते हुए 'लौहमहिला' तक पहुँचकर उन्हें घेरे में ले लेते हैं। लेकिन अभ्यर्थी लौहमहिला को बाहर निकलने देने को तैयार नहीं।
भावी आशंका को देखकर दारोगा CO को फ़ोन करते हैं।
थोड़ी देर में दो थानों की पुलिस के साथ CO हाजिर।
वे लौहमहिला तक पहुँचकर उन्हें निकलने को कहते हैं।
लौहमहिला द्वारा अभ्यर्थियों के बारे में प्रश्न करने पर CO कहते हैं, "आप निकलिए, इन्हें हम देख लेंगे।" CO की बात का मतलब 'लौहमहिला' समझ जाती हैं।
अब दिखती है लौहमहिला की संवेदनशील आत्मा जो कहती है, "नहीं इन्हें कुछ मत करिएगा। बेचारे दूर-दूर से आये हैं, परिस्थितियों के सताये हैं।"
अंततः कुछ (लाठीचार्ज) न करने के आश्वासन पर परिसर खाली कराया जाता है। हज़ारों लोगों को बाहर आने में ही आधा-पौन घंटा लग जाता है।
निकल जाने की सलाह के बावजूद लौहमहिला अभ्यर्थियों से बात करती हैं और उनका संवेदनशील स्वरूप फिर दिखता है जब वे अभ्यर्थियों से कहती हैं, "आप निराश न हों। मैं आप सबकी फ़ाइल जमा करूँगी और कल हर फ़ाइल की फीडिंग भी होगी। बस थोड़ी व्यवस्था बनायें और 25 स्वयंसेवक कैटेगरी अनुसार files जमा करें और मार्कर से हर फ़ाइल पर cut off लिख दें।"
फिर सुतली आदि का प्रबंध करके उक्त कार्य देर रात तक हुआ।
बाद में सबकी फीडिंग भी हुई जबकि अन्यों द्वारा उन फाइलों पर ध्यान न देने की 'सलाह' भी दी गयी थी। इनमें से अनेक अभ्यर्थियों को बाद में सर्विस भी मिली।
लेकिन मुख्य बात थी :
1. लौहमहिला द्वारा अपनी बजाय शेष साथियों की सुरक्षा को प्राथमिकता
2. भयंकर प्रतिकूलता के मध्य भी धैर्य न खोना
3. खुद पर हमलावर अभ्यर्थियों की सुरक्षा के प्रति भी संवेदनशील दृष्टिकोण रखना
4. अभ्यर्थियों की भावनाओं और भविष्य को दृष्टिगत रखकर उन्हें काउन्सलिंग में मौका देना
और इस प्रकार उस असली नेतृत्व-क्षमता के दर्शन कराना, जिसमें धैर्य, साहस, परहित-चिंतन, संवेदनशीलता, विशाल हृदय और दूरदर्शिता जैसे मानवीय गुणों का दुर्लभ संगम झलकता है।
जानते हैं कौन हैं ये 'संवेदनशील लौहमहिला'?
जी हाँ, हम सबकी आदरणीया और प्रेरक व्यक्तित्व की स्वामिनी श्रीमती शिवानी यादव मैडम (वरिष्ठ प्रवक्ता और DIET Bareilly की पर्याय)
प्रशान्त अग्रवाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय डहिया,
विकास क्षेत्र फतेहगंज पश्चिमी,
ज़िला-बरेली (उ.प्र.)

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