मैं नारी हूँ
मैं नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
मैं नव भारत की नारी हूँ।
चाहें लाख बिछा लो बंदिशें,
मैं उसे चीर निकल जाऊँगी।
चाहे जकड़ दो जंजीरों से,
उसको तोड़कर दिखलाऊँगी।
मैं नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
मैं नवभारत की नारी हूँ।
साहस त्याग दया ममता की प्रतीक मैं,
लेकिन कठिन लम्हों में लक्ष्मीबाई की रूप में।
लाख बाधाएँ आयें जीवन में,
डरती नहीं, थकती नहीं, रुकती नहीं मैं।
मै नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
मै नवभारत की नारी हूँ।
अर्थ जगत हो या नभ मंडल,
किन्चित विचलित न होती मैं।
जननी हूँ सम्पूर्ण जगत की,
गौरव भी हूँ अपनी संस्कृति की।
मैं नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
मैं नव भारत की नारी हूँ।
उत्थान पतन के रूप अनेक,
जीवन में देखा है अनेक।
मैं नही सहूँगी, मैं नहीं मिटूँगी,
पथ पर आगे बढ़ती जाऊँगी।
मैं नारी हूँ, मै नारी हूँ।
मैं नव भारत की नारी हूँ।
हर बार हमें सहना पड़ता,
समाज के कुन्ठित वचनों को,
क्रोधाग्नि भड़क उठती प्रचंड,
हो जाता हृदय स्थल अधीर,
पी जाती अमृत की घूट समझ।
मैं नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
मै नवभारत की नारी हूँ।
है भारत पुरुष प्रधान मेरा,
मै भी सम्मान करती हूँ।
नव युवकों से जीवन में,
एक एहसान चाहती हूँ।
दो साथ मेरा कदम मिलाकर,
मै भी आगे बढ़ जाऊँ।
दो लफ्ज़ हों प्रेरणा के तो,
मैं इतिहास बदल डालूँ।
मैं नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
मैं नव भारत की नारी हूँ।
रचयिता
बिधु सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गढी़ चौखण्ड़ी,
विकास खण्ड-बिसरख,
जनपद-गौतमबुद्धनगर।
मैं नव भारत की नारी हूँ।
चाहें लाख बिछा लो बंदिशें,
मैं उसे चीर निकल जाऊँगी।
चाहे जकड़ दो जंजीरों से,
उसको तोड़कर दिखलाऊँगी।
मैं नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
मैं नवभारत की नारी हूँ।
साहस त्याग दया ममता की प्रतीक मैं,
लेकिन कठिन लम्हों में लक्ष्मीबाई की रूप में।
लाख बाधाएँ आयें जीवन में,
डरती नहीं, थकती नहीं, रुकती नहीं मैं।
मै नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
मै नवभारत की नारी हूँ।
अर्थ जगत हो या नभ मंडल,
किन्चित विचलित न होती मैं।
जननी हूँ सम्पूर्ण जगत की,
गौरव भी हूँ अपनी संस्कृति की।
मैं नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
मैं नव भारत की नारी हूँ।
उत्थान पतन के रूप अनेक,
जीवन में देखा है अनेक।
मैं नही सहूँगी, मैं नहीं मिटूँगी,
पथ पर आगे बढ़ती जाऊँगी।
मैं नारी हूँ, मै नारी हूँ।
मैं नव भारत की नारी हूँ।
हर बार हमें सहना पड़ता,
समाज के कुन्ठित वचनों को,
क्रोधाग्नि भड़क उठती प्रचंड,
हो जाता हृदय स्थल अधीर,
पी जाती अमृत की घूट समझ।
मैं नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
मै नवभारत की नारी हूँ।
है भारत पुरुष प्रधान मेरा,
मै भी सम्मान करती हूँ।
नव युवकों से जीवन में,
एक एहसान चाहती हूँ।
दो साथ मेरा कदम मिलाकर,
मै भी आगे बढ़ जाऊँ।
दो लफ्ज़ हों प्रेरणा के तो,
मैं इतिहास बदल डालूँ।
मैं नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
मैं नव भारत की नारी हूँ।
रचयिता
बिधु सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गढी़ चौखण्ड़ी,
विकास खण्ड-बिसरख,
जनपद-गौतमबुद्धनगर।

Comments
Post a Comment