मैं नारी हूँ
मैं नारी हूँ।
हाँ मैं नारी हूँ।
मुझे गर्व है नारी होने पर।
उससे भी बड़ा गर्व है मुझे भारतीय नारी होने पर।
क्यों गढ़ दी गई ऐसी परिभाषा भारतीय नारी की,
लाचार, बेबस, कमजोर,
निर्विचार, नि:शब्द, निष्फल।
संस्कारों के नाम पर अंधाधुंध शोषण।
क्यों नहीं बल दिया उसकी निर्बलता को,
क्यों नहीं शब्द दिये उसकी नि:शब्दता को,
क्यों नहीं विचार दिए उसकी निर्विचारता को।
क्यों? क्यों? क्यों?
सिर्फ इसलिए कि मैं नारी हूँ।
क्यों संस्कारों के नाम पर सिर्फ नारी को ही ठगा गया।
क्यों नहीं पंख दिए उसकी उड़ानों को,
क्यों नहीं आकाश दिया उसके विचारों को,
क्यों नहीं हल्का कर दिया उसके कंधों को,
क्यों? क्यों? क्यों?
सिर्फ इसलिए कि मैं नारी हूँ।
क्यों उसे टटोलना पड़ता है अपना अस्तित्व,
कवि की कविता में,
लेखक की कहानी में,
क्यों वो ढूंढती है अपना चरित्र,
पर्दे के किरदारों में।
क्यों उसे पत्नी के नाम पर ठगा जाता है,
तो कभी पुत्री के नाम पर।
क्यों बहनों के नाम पर कुर्बानी देनी पड़ती है,
और इन सब से जूझ भी जाए तो क्यों दरिंदों की दरिंदगी झेलनी पड़ती है।
क्यों? क्यों? क्यों?
सिर्फ इसलिए कि मैं नारी हूँ।
ऐसी विषम परिस्थितियों में भी खड़ी,
तभी तो झाँसी की रानी देश के लिए लड़ी।
जीजाबाई, पद्मावती, कल्पना को,
शक्ति दी है इस देश की मिट्टी ने,
बहुत शक्ति है मेरे देश की मिट्टी में।
मुझे गर्व है इसकी पवित्रता पर,
मुझे गर्व है अपनी दृढ़ता पर।
मुझे गर्व है मेरे नारी होने पर,
और इससे भी बड़ा गर्व है मुझे भारतीय नारी होने पर।
हाँ मैं नारी हूँ।
हाँ मैं भारतीय नारी हूँ।
रचयिता
गीता शाक्य "गीत",
प्राथमिक विद्यालय इलायचीपुर,
विकास खण्ड-लोनी,
जनपद-गाजियाबाद।
हाँ मैं नारी हूँ।
मुझे गर्व है नारी होने पर।
उससे भी बड़ा गर्व है मुझे भारतीय नारी होने पर।
क्यों गढ़ दी गई ऐसी परिभाषा भारतीय नारी की,
लाचार, बेबस, कमजोर,
निर्विचार, नि:शब्द, निष्फल।
संस्कारों के नाम पर अंधाधुंध शोषण।
क्यों नहीं बल दिया उसकी निर्बलता को,
क्यों नहीं शब्द दिये उसकी नि:शब्दता को,
क्यों नहीं विचार दिए उसकी निर्विचारता को।
क्यों? क्यों? क्यों?
सिर्फ इसलिए कि मैं नारी हूँ।
क्यों संस्कारों के नाम पर सिर्फ नारी को ही ठगा गया।
क्यों नहीं पंख दिए उसकी उड़ानों को,
क्यों नहीं आकाश दिया उसके विचारों को,
क्यों नहीं हल्का कर दिया उसके कंधों को,
क्यों? क्यों? क्यों?
सिर्फ इसलिए कि मैं नारी हूँ।
क्यों उसे टटोलना पड़ता है अपना अस्तित्व,
कवि की कविता में,
लेखक की कहानी में,
क्यों वो ढूंढती है अपना चरित्र,
पर्दे के किरदारों में।
क्यों उसे पत्नी के नाम पर ठगा जाता है,
तो कभी पुत्री के नाम पर।
क्यों बहनों के नाम पर कुर्बानी देनी पड़ती है,
और इन सब से जूझ भी जाए तो क्यों दरिंदों की दरिंदगी झेलनी पड़ती है।
क्यों? क्यों? क्यों?
सिर्फ इसलिए कि मैं नारी हूँ।
ऐसी विषम परिस्थितियों में भी खड़ी,
तभी तो झाँसी की रानी देश के लिए लड़ी।
जीजाबाई, पद्मावती, कल्पना को,
शक्ति दी है इस देश की मिट्टी ने,
बहुत शक्ति है मेरे देश की मिट्टी में।
मुझे गर्व है इसकी पवित्रता पर,
मुझे गर्व है अपनी दृढ़ता पर।
मुझे गर्व है मेरे नारी होने पर,
और इससे भी बड़ा गर्व है मुझे भारतीय नारी होने पर।
हाँ मैं नारी हूँ।
हाँ मैं भारतीय नारी हूँ।
रचयिता
गीता शाक्य "गीत",
प्राथमिक विद्यालय इलायचीपुर,
विकास खण्ड-लोनी,
जनपद-गाजियाबाद।

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