३०४~ जागेश्वर दयाल, प्राथमिक विद्यालय बेला सारायगजा ब्लॉक- शमसाबाद जनपद- फर्रुखाबाद

🏅अनमोल रत्न🏅

मित्रों आज हम आपका परिचय मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से जनपद- फर्रुख़ाबाद से एक ऐसे अनमोल रत्न शिक्षक साथी भाई जागेश्वर दयाल जी से करा रहे हैं जिन्होंने अपनी सकारात्मक सोच और मजबूत संकल्पशक्ति की शक्ति से उस कहावत को प्रमाणित कर दिखाया। जिसमें कहा जाता है कि-
"अतिशय रगड़ करे जो कोई, अनल प्रगट चन्दन से होई"
आप ने रुग्ण पड़ चुकी विद्यालय की व्यवस्था को अपनी संकल्प शक्ति से ऐसी संजीवनी प्रदान की, जिससे अनेकों नकारात्मक ध्वनियाँ आज सकारात्मकता का शंखनाद करती नजर आज रही हैं।
मिशन शिक्षण संवाद परिवार की ओर से हम ऐसे कर्मयोगी संकल्प वीर को विद्यालय परिवार के समस्त सहयोगियों सहित सादर नमन करते हैं।

आइये देखते हैं एक संकल्प वीर अनमोल रत्न के संघर्ष की प्रेरक कहानी:-

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👉1-नाम- जागेश्वर दयाल, सहायक अध्यापक
नियुक्ति वर्ष- 26.07.2013 को इ०प्र०अ० के पद पर
विभाग में नियुक्ति वर्ष- 2013
👉2- बेसिक शिक्षा में नियुक्ति के रूप में मेरा यह पहला विद्यालय था। प्राइवेट सेक्टर में काफ़ी ठोकरें खाने के बाद हमें ये सुनहरा अवसर मिला। चूँकि पहले भी मैं शिक्षा से जुड़ा रहा, कई साल निजी क्षेत्र में शिक्षण कार्य किया था। तो पहले से ही मैं अपने आप में एक आदर्श शिक्षक की छवि स्वयं में उतारने का सदा प्रयास करता रहा, चूँकि पहले से ही मैंने संकल्प ले रखा था कि जिस स्कूल में मेरी नियुक्ति होगी उसे आदर्श विद्यालय बनाऊंगा। उसी नेक भावना के साथ मैंने काम करना शुरू किया। विद्यालय में पहले से ही दो शिक्षा मित्र कार्यरत थे जो आपसी गुटबाज़ी के शिकार थे। मैंने अकेले ही नया सफ़र शुरू कर दिया। शिक्षण व्यवस्था ठीक न होने के कारण अभिभावकों का स्कूल से मोह भंग हो रहा था। एवं बच्चे अन्य स्कूल में पलायन करने लगे थे। मैंने तीन सिद्धान्तों पर काम करना शुरू किया।
1. Punctuality
2. Regularity
3. Discipline

एवं गाँव के लोगों से बात करके ये विश्वास दिलाया कि आप बच्चे भेजें मैं पूरे मनोयोग से प्रयास करूँगा।
एक साल लोगों ने मेरा काम देखा। सभी लोग हमारे काम से सन्तुष्ट हुए। अगले वर्ष बच्चों का पलायन रुका साथ ही गाँव में चलने वाली मॉन्टेशरी से बच्चे आना शुरू हुए। मैं अपना काम पूरी ईमानदारी से करता रहा। धीरे-धीरे पूरे गाँव में चर्चा होने लगी। बेसिक में इस तरह का काम लोगों को किसी चमत्कार से कम नहीं लग रहा था। एक दिन मॉन्टेशरी के हेड ने मुझसे कहा कि आप तो लगता ही नहीं कि सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं। कई पुराने शिक्षकों ने कई तरह के व्यंग दागे। कोई कहता क्यों जान दे रहे हो? कोई कहता अभी नए हो इसलिए जोश है, कुछ दिनों में ढर्रे पर आ जाओगे। पर मैंने भी संकल्प कर रखा था, कि कुछ भी हो मैं अपने को कार्य से विमुख नही होने दूँगा। मैं ईश्वर से भी यही प्रार्थना करता कि हे! ईश्वर मुझे शक्ति देना कि मैं अपने कार्य से विमुख न होऊं। सन-2015 में स्कूल में हेड कु०अनुपमा आयीं। अगले ही महीने उन्होंने अपना समायोजन अन्य स्कूल में करा लिया। नवम्बर-2015 में हमारे यहाँ मि० पुष्पराज सिंह जी आये, ज्वाइन कराते समय मैंने उनसे साफ शब्दों में कह दिया कि आपको ठीक से कार्य करना पड़ेगा। एक साल तो उन्होंने डर-डर के काम किया पर उसके बाद वह माहौल से परिचित हो गए और बेहतर काम किया। अब हमारी ताकत दोगुनी हो चुकी थी। शिक्षा मित्रों की आपसी गुटबाजी की वजह से विद्यालय का माहौल खराब था। उनसे बात की और दोनों की आपस में सुलह करायी। प्रधान जी से एमडीएम के सम्बन्ध में काफ़ी तनातनी रही क्योंकि खाने की गुणवत्ता ठीक नहीं थी। मैंने उनसे साफ शब्दों में कहा कि या तो खाने की गुणवत्ता ठीक करिये अन्यथा खाना बनवाने का चार्ज मुझे दीजिये। उन्होंने मुझ पर काफी दबाव बनाया पर मैं झुका नहीं। बच्चों के साथ अन्याय मुझसे बर्दाश्त नहीं होता था। धीरे-धीरे प्रधान जी समझ गए कि अध्यापक अपनी जगह सही है।
विद्यालय में बाउंड्रीवाल न होने के कारण स्कूल का भौतिक परिवेश ठीक नहीं हो पा रहा था। क्षेत्रफल अधिक होने के कारण बाउंड्रीवाल बनाने में समस्या आ रही थी। पेड़ लगाते जानवर चर जाते।
👉सत्र 2015-16 में 35 बच्चों का प्रवेश हुआ।
👉सत्र 2016-17 में 70 बच्चों का प्रवेश हुआ।
👉सत्र 207-18 में 100 बच्चों का प्रवेश हुआ।

👉3. विद्यालय के भौतिक परिवेश के सुधार में पहले तो मैं सरकार की सराहना करता हूँ क्योंकि सरकार ने 14वें वित्त आयोग में विद्यालयों को ग्राम पंचायत से जोड़ा। दूसरा धन्यवाद मैं गाँव की सरपंच श्रीमती मेधा मिश्रा जी एवं उनके पति श्री मनोज कुमार मिश्र जी, जो जिला पंचायत सदस्य हैं। शुरू में विद्यालय में काम कराने में वें उदासीन थे। पर मैंने उन्हें समझाया कि यह काम आपके जीवन का नेक काम सिद्ध होगा और हो सकता है आप आगे चलकर एमएलए बन जायें।
अन्ततः मैं अपनी बात समझाने में सफल हो गया। मैंने नेट से कलेक्ट करके कई जिलों के मॉडल स्कूलों के चित्र दिखाए। रोज कुछ नया बताता उनको मानो चमत्कार सा हो गया और उन्होंने कहा मास्टर साहब आप काम देखें मुझे समय का अभाव रहता है। आप ही देखें और अच्छे से अच्छा काम करायें। धीरे-धीरे मेरा सपना सच होता नजर आने लगा। 8-10 महीने में विद्यालय बिल्कुल बदल चुका था। पहले और अब के विद्यालय में जमीन और आसमान में अंतर आ गया था। अब बारी हम लोगों की थी, पेड़ पौधे लगाने की इसके लिए मैंने और पुष्पराज सिंह जी ने मिलकर नर्सरी से 70-80 पौधे ले आये और इन्हें पूरे कैम्पस में लगा दिए। कुछ पौधे प्रधान जी ने भी लगवाये और 12 बच्चों को स्पोर्ट ड्रेस भी दिलवाई, जो प्रधान जी किसी दिन एंटी थी आज प्रशंसक हो गए।


 उसी समय अंग्रेजी माध्यम से स्कूल चुनने की सूचना आयी, मैंने मि० चन्द्रकान्त दुबे जी से प्रार्थना की। कि हमारे स्कूल को अंग्रेजी माध्यम के लिए चुनवा दो। आखिरकार सपना सच हुआ, मेरा स्कूल अंग्रेजी माध्यम के लिए चुन लिया गया। साथ ही अप्रैल 2018 से तीन नए शिक्षक मिल गए। एक हेड व 2 सहायक अध्यापक। 19 मई 2018 को राज्यमंत्री श्रीमती अर्चना पाण्डे जी ने विद्यालय का उद्घाटन किया। गर्मियों की छुट्टियों के बाद पूरा स्टाफ़ जी जान से जुट गया। हम सभी शिक्षक टीम भावना से काम करते हैं। नित नए आयामों से बच्चों के सर्वांगीण विकास की कोशिश कर रहे हैं।
👉4. हमारे साथ विद्यालय के विकास में श्री पुष्पराज सिंह का भी साथ रहा। बच्चे जब मण्डल स्तर पर खो- खो में जीतकर आये तो 22 बच्चों को ग्राम प्रधान श्रीमती मेघा मिश्रा ने स्पोर्ट ड्रेस भेंट की एवं जब मॉडल रूप में चुने जाने पर विद्यालय को मॉडल रूप में विकसित करने में बड़ी भूमिका निभाई। बाद में 5 पंखों व फिटिंग कराने में अभिभावकों में सहयोग किया। स्कूल कैम्पस को गार्डन रूप में विकसित करने में सभी शिक्षकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

👉5. छात्र संख्या 230, वार्षिक उपस्थिति 90%
1. हर माह पीटीएम का आयोजन
2. सम्पर्क सूत्र के लिए प्रत्येक अभिभावक का मोबाइल नम्बर संकलित किया गया।
3. बच्चे के स्कूल न आने पर फोन से सम्पर्क।
समस्या का समाधान न होने पर घर -घर जाकर सम्पर्क करना व शिक्षा का महत्व बताना।
4. खेल, कविता, कहानी एवं गतिविधि के द्वारा शिक्षा।
5. प्रत्येक माह टेस्ट का आयोजन करना और पीटीएम में उनके अभिभावकों को अवगत कराना।
6. बाल सभा का आयोजन प्रत्येक शनिवार को करना, baal सभा में बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु उनकी प्रतिभा को पहचानना एवं उन्हें अवसर प्रदान करना।
7. समय-समय पर प्रतियोगिताओं का आयोजन जैसे, words meaning, सुलेख, फैशन शो, नृत्य आदि।
8. बाल संसद का गठन एवं दो पदों का निर्धारण।
9. मीटिंग में अभिभावकों को समझाना कि शिक्षा महत्वपूर्ण है, शिक्षा के बिना बच्चे का सम्पूर्ण विकास सम्भव नहीं है।
6. विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण बेहतर हुआ। समय सारणी के अनुसार प्रत्येक शिक्षक अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। शिक्षण गतिविधियों में खेल-खेल में, कविता, कहानी आदि माध्यमों से बोझिल माहौल से बच्चों को मुक्त रखती है। बच्चे खुशी-खुशी विद्यालय आते हैं।
प्रार्थना सभा में विचार, आज का इतिहास, सामान्य ज्ञान से सम्बन्धित प्रश्न उत्तर आदि। प्रार्थना सभा लगभग 30 मिनट की रहती है।जिसमें सभी शिक्षक प्रेरक प्रसंगों से बच्चों के ज्ञान में वृद्धि करते हैं।
7. मुझे एवं श्री पुष्पराज जी को उत्कृष्ट शिक्षक के रुप में चुना गया।
खो-खो बालक वर्ग में एक बार राज्य स्तर पर एवं एक मण्डल स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया, साथ ही एक बालक ने 100 मी0 दौड़ में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
बालिका वर्ग खो-खो में मण्डल स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया।
80% बच्चे हिंदी पढ़ लेते हैं।
60% बच्चे अंग्रेजी पढ़ लेते हैं।
60% बच्चे अंग्रेजी में अपना परिचय दे लेते हैं।
वर्तमान सत्र में जिले में सबसे ज्यादा 100 प्रवेश करने का रिकॉर्ड।
10 गाँव के बच्चे स्कूल में पढ़ने आते हैं।

🙏संदेश- अगर आप अपने काम को आदर्श स्थिति में ले जाना चाहते हैं तो जुनून की हद तक काम करें। अपने काम को पूजा मानकर करें। काम बोझ न समझें बल्कि काम को इंज्वाय करें। बच्चे शिक्षक को रोल मॉडल मानते हैं। इसलिए कथनी और करनी में अंतर न करें।
सुझाव- जीवन में तीन सिद्धान्तों का अनुसरण करें;
1. Regularity
2. Punctuality
3. Discipline
कक्षा एक के बच्चों को LSRW शिक्षण कौशलों के अनुसार ही पढायें।
अगर आपने कक्षा एक ठीक कर ली तो आपने आधी से ज्यादा जंग जीत ली।

विद्यालय का नाम- प्राथमिक विद्यालय बेला सारायगजा।
ब्लॉक- शमसाबाद
जनपद- फर्रुखाबाद

संकलन: आशीष शुक्ला
टीम मिशन शिक्षण संवाद

👉नोट:- आप अपने मिशन परिवार में शामिल होने, आदर्श विद्यालय का विवरण भेजने तथा सहयोग व सुझाव को अपने जनपद सहयोगियों को अथवा मिशन शिक्षण संवाद के वाट्सअप नम्बर-9458278429 और ई-मेल shikshansamvad@gmail.com पर भेज सकते हैं।

निवेदक: विमल कुमार
10-03-2019

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