महिला दिवस
नारियों के मान का,
स्वत्व के सम्मान का।
आन, मान स्वाभिमान का।
नारी के गौरव महान का।
दृष्टी के विहान का,
मनुष्यता के प्राण का।
संस्कृति के विकास का,
नेह के मधुमास का।
सभ्यता की मृदुहास का।
भावना में प्यार का,
प्यार के हर विचार का,
जीवंत भाव प्यार का।
लोकरीतियों के प्रवाह का।
नव विकास के राह का।
ममत्व के उपकार का,
संवेदना की धार का।
चिन्तन में समतत्व का,
समत्व के हर तत्व का।
आज यह विचार हो,
विचार का प्रसार हो।
जो पालती है जन्म दे।
जीवंत सेवा साथ दे।
महान वह जहान में,
आप्त के प्रमाण में।
सम्मान में सलाम दो,
बराबरी का पैगाम दो।
अधिकार सब मिलें उन्हें,
अवसर समान दो उन्हें।
मनुष्यता का भाव हो,
न क्षुद्र स्वार्थ भाव हो।
अपचार का निषेध हो,
अपकृत्य का विरोध हो।
शिक्षित उन्हें बनाइए,
हर बेटी को अब पढ़ाइए।
एकात्म भाव शोध हो,
एकात्म भाव बोध हो।
नारी को मनुष्य मानिए,
अनुदान सब पहचानिए।
कोरी न कोई बात हो,
भावों में न रात हो।
नवीनतम विचार हों,
मनुष्यता के उजार हों।
राष्ट्र संघ का उदघोष है,
नारी अधिकारों का संनिवेश है।
रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला,
जनपद -सीतापुर।
स्वत्व के सम्मान का।
आन, मान स्वाभिमान का।
नारी के गौरव महान का।
दृष्टी के विहान का,
मनुष्यता के प्राण का।
संस्कृति के विकास का,
नेह के मधुमास का।
सभ्यता की मृदुहास का।
भावना में प्यार का,
प्यार के हर विचार का,
जीवंत भाव प्यार का।
लोकरीतियों के प्रवाह का।
नव विकास के राह का।
ममत्व के उपकार का,
संवेदना की धार का।
चिन्तन में समतत्व का,
समत्व के हर तत्व का।
आज यह विचार हो,
विचार का प्रसार हो।
जो पालती है जन्म दे।
जीवंत सेवा साथ दे।
महान वह जहान में,
आप्त के प्रमाण में।
सम्मान में सलाम दो,
बराबरी का पैगाम दो।
अधिकार सब मिलें उन्हें,
अवसर समान दो उन्हें।
मनुष्यता का भाव हो,
न क्षुद्र स्वार्थ भाव हो।
अपचार का निषेध हो,
अपकृत्य का विरोध हो।
शिक्षित उन्हें बनाइए,
हर बेटी को अब पढ़ाइए।
एकात्म भाव शोध हो,
एकात्म भाव बोध हो।
नारी को मनुष्य मानिए,
अनुदान सब पहचानिए।
कोरी न कोई बात हो,
भावों में न रात हो।
नवीनतम विचार हों,
मनुष्यता के उजार हों।
राष्ट्र संघ का उदघोष है,
नारी अधिकारों का संनिवेश है।
रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला,
जनपद -सीतापुर।

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