मैं नारी हूँ
नारी हूँ, मैं नारी हूँ,
न कभी किसी से हारी हूँ।
बेटी बन मुस्कान बिखेरी,
माँ बनकर बाँटा है प्यार।
दुल्हन बनकर नई नवेली,
लाई जीवन में श्रृंगार।
नारी हूँ, मै नारी हूँ,
न कभी किसी से हारी हूँ।
पंख पसारे, खुले गगन में,
मै उड़ती ही जा रही,
संकट के बादल को पाल,
मैं दूर हटाती जा रही।
नारी हूँ, मै नारी हूँ,
कभी किसी से हारी हूँ।
क्यों भूलूँ मैं, अपने सपने,
जिसे पाला है, अपने मन में।
मेरी खुशियाँ, मेरे अपने,
जिनके लिए मैं जीती जग में।
नारी हूँ, मै नारी हूँ,
न कभी किसी से हारी हूँ...
रचयिता
रश्मि मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मरुआंन,
जनपद-प्रतापगढ़।
न कभी किसी से हारी हूँ।
बेटी बन मुस्कान बिखेरी,
माँ बनकर बाँटा है प्यार।
दुल्हन बनकर नई नवेली,
लाई जीवन में श्रृंगार।
नारी हूँ, मै नारी हूँ,
न कभी किसी से हारी हूँ।
पंख पसारे, खुले गगन में,
मै उड़ती ही जा रही,
संकट के बादल को पाल,
मैं दूर हटाती जा रही।
नारी हूँ, मै नारी हूँ,
कभी किसी से हारी हूँ।
क्यों भूलूँ मैं, अपने सपने,
जिसे पाला है, अपने मन में।
मेरी खुशियाँ, मेरे अपने,
जिनके लिए मैं जीती जग में।
नारी हूँ, मै नारी हूँ,
न कभी किसी से हारी हूँ...
रचयिता
रश्मि मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मरुआंन,
जनपद-प्रतापगढ़।

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