जंगल की आग

कक्षा-5
विषय-हिंदी
पाठ- 7, भाग-2

एक जंगल में लगी आग,
 जानवर भागे बुझाने आग।
जो भी बर्तन लगा हाथ,
उसमें पानी भरकर साथ।
लगे बुझाने फिर आग,
मिलकर जुट गये सभी साथ।
तभी नन्हीं गौरैया आयी,
चोंच में भरकर पानी लायी।
पूरी कोशिश से आग बुझाई।
एक कौआ दूर बैठा था,
गौरैया पर हँस रहा था।
बोला बेकार मेहनत करती हो,
बूँद-बूँद पानी भरती हो।
भयंकर आग नहीं बुझेगी,
कैसे छोटी चोंच मदद करेगी।
गौरैया बोली सब जानती हूँ,
सभी को पहचानती हूँ।
जब भी बात जंगल की होगी,
उसमें मेरी याद जरूर होगी।
मेरा नाम बुझाने में होगा,
मेरी कोशिश को सलाम होगा।
जो देख रहा था तमाशा,
कौआ का नाम उसमे होगा।
गौरैया की हिम्मत से सीखो,
स्वयं को कभी कम न समझो।

रचयिता
रीना सैनी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गिदहा,
विकास खण्ड-सदर,
जनपद -महाराजगंज।

Comments

  1. Bahut sundar ... Superb. .. 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻💐💐💐💐

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