नकल अकल

कठिन परिश्रम सतत पढ़ाई,
सफलता की ये राह बताई।

गुरुओं का करो सम्मान,
जो देते हैं अक्षर ज्ञान।

नकल से ना हो बेड़ा पार,
अकल तारती परले पार।

मेरी ये विनती है सबसे,
नकल छोड़ दो बच्चों अब से।

बच्चों को जो करवाते नकल
बच्चों के भविष्य का करें कतल।

जो करते परीक्षा में नकल,
वो जीवन मे ना होते सफल।

परिश्रम सफलता की कुंजी है,
शिक्षा ही तो असली पूंजी है।

अकल से तुम शिक्षा पाओ,
नकल से ना ये मौका गवाओ।

'भारती' का ये कहना है,
शिक्षा ही सच्चा गहना है।
उसका जीवन हो मंगलमय,
जिसने भी अकल से पहना है।

रचयिता 
भूपसिंह भारती, 
शिक्षक,
रावमा विद्यालय पटीकरा,
खण्ड नारनौल, 
जिला महेन्द्रगढ़ (हरियाणा)
पिन 123001, 
मो0 9416237425

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