वह घर होता स्वर्ग समान

वह घर होता स्वर्ग समान
जिस घर में होता नारी का सम्मान

नारी ईश्वर की अनूठी कृति
ममता, स्नेह और दया की मूर्ति
जिसका करें सब गुणगान,
वह घर होता स्वर्ग समान
जिस घर में होता नारी का सम्मान।

एक ही रूप में है कितने रिश्तों को निभाती।
कभी माँ, बहन और बेटी तो
कभी बहू बन ससुराल है जाती।
होती है हर घर की शान,
वह घर होता स्वर्ग समान
जिस घर में होता नारी का सम्मान ।
     
        (पुरुषों से आवाह्न)

पुरुषों से है बस एक ही विनती,
 उसका न कभी अपमान करो।
कोख से जन्मे हो तुम जिसकी
उस माँ का कम न होने देना मान
वह घर होता स्वर्ग समान,
जिस घर में होता नारी का सम्मान।

नारी से ही उत्पत्ति तुम्हारी
कभी माँ तो कभी पत्नी बन,
जिसने तुम्हारी जिंदगी सँवारी।
जो तुमको माने अपना जहान।
वह घर होता स्वर्ग समान
जिस घर में होता नारी का सम्मान।
   
        (नारियों से आवाह्न)

अब न स्वयं को अबला समझो
तुम सबकी विचारधारा बदलो।
कह दो कि नारी अब अबला नहीं
बन गयी वो सबला है।
समाज की चुनौतियों से लड़ने को
 हमने स्वयं को बदला है।
स्वयं बनाओ अपनी पहचान।
वह घर होता स्वर्ग समान
जिस घर में होता नारी का सम्मान।

अपने मान-सम्मान को बचा लो
गिरते हुए अस्तित्व को संभालो
बस एक दिन ही नहीं
हर दिन तुम नारी दिवस मना लो।
तुमसे ही है ये सारा जहान।
वह घर होता स्वर्ग समान
जिस घर में होता नारी का सम्मान।

रचयिता
रीनू पाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय दिलावलपुर,
विकास खण्ड - देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

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