तुम अबला नहीं हो
तुम अबला नहीं हो
दुश्मन के लिए एक बला हो
बेटी हो, बहन हो,
प्रेमिका हो, पत्नी हो
हर रिश्ता निभाती हो दिल से....
ममतामयी माँ तुम ही हो
सहनशील हो, धैर्यवान हो
सयंमशील हो, दयावान हो
गुणों की खान हो तुम......
प्रकृति का अनोखा वरदान हो
माना
शर्मीली हो, कोमल हो
नाजुक हो लचीली हो
पर
दबो ना तुम, हारो ना तुम
मत भूलो....
शक्ति तुम, दुर्गा तुम
काली तुम, चामुण्डा तुम ही हो
रचयिता
अरूणा कुमारी राजपूत,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय राजपुर(अंग्रेजी़ माध्यम),
विकास खण्ड-सिंभावली ,
जिला-हापुड़।
दुश्मन के लिए एक बला हो
बेटी हो, बहन हो,
प्रेमिका हो, पत्नी हो
हर रिश्ता निभाती हो दिल से....
ममतामयी माँ तुम ही हो
सहनशील हो, धैर्यवान हो
सयंमशील हो, दयावान हो
गुणों की खान हो तुम......
प्रकृति का अनोखा वरदान हो
माना
शर्मीली हो, कोमल हो
नाजुक हो लचीली हो
पर
दबो ना तुम, हारो ना तुम
मत भूलो....
शक्ति तुम, दुर्गा तुम
काली तुम, चामुण्डा तुम ही हो
रचयिता
अरूणा कुमारी राजपूत,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय राजपुर(अंग्रेजी़ माध्यम),
विकास खण्ड-सिंभावली ,
जिला-हापुड़।

बेहतर पंक्तियां
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Delete