हर घर की पहचान है नारी

सब सँभाल लेती है नारी

मुश्किल से उबारती नारी

बाहर-भीतर सभी सजाती

माँ का अभिमान है नारी

हर घर की पहचान है नारी.. 

 जीवन-भर अथक परिश्रम करती

मन की बात सभी के पढ़ती

दया शांति की जान है नारी

हर घर की पहचान है नारी.. 

भाव, विचार कागज पर उतारती

सबको खुशियाँ, प्यार बाँटती

काम सभी के करती जाती

बच्चों की जान है नारी

हर घर की पहचान है नारी.. 

     उद्यम से मंजिल पा जाती

     स्नेह, त्याग सबको सिखलाती

      हर मुकाम जीत जाती नारी

       दिवा-रात्रि की शान है नारी

        हर घर की पहचान है नारी... 

शौक अरमान जगाती जाती

एकता का पाठ पढ़ाती

सजग भूमिका सभी निभाती

कई क्षेत्रों का मान है नारी

हर घर की पहचान है नारी... 

     किंतु इसे सम्मान चाहिए

     नहीं इसे अपमान चाहिए

      भद्दे विज्ञापनों, कुविचारों से

      हर नारी को मुक्ति चाहिए

     क्योंकि, हर घर की पहचान है नारी.

     

रचयिता

गीता जोशी, 
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय जैनौली, 
विकास खण्ड-ताड़ीखेत, 
जनपद-अल्मोड़ा,
उत्तराखण्ड।




Comments

  1. नमन् है नारी शक्ति को

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