हमको शिक्षा है भरनी

यों मंजिल पर आगे

 बढ़ती ही जाना।

 हौंसलों से अपने,

नये मुकाम तुम बनाना।

तुम हो  एक शक्ति,

साक्षरता को बढ़ाना।

कुछ गंदे हैं कपड़े,

 ना तुम हिचकिचाना।

चमक उनकी आँखों में,

उनको मंजिल तुम दिखाना।

क्यों ना जीवन में उनको,

 मजदूरी  पड़े करनी।

पर उनके जीवन में,

 हमको शिक्षा है भरनी।

है नंगे पैर, नंगे बदन पर,

 कमीज़ फटी पुरानी।

शिक्षा उनको देना,

 तुम हो शक्ति भवानी!!

   

रचनाकार
दीपमाला शाक्य दीप,
शिक्षामित्र,
प्राथमिक विद्यालय कल्यानपुर,
विकास खण्ड-छिबरामऊ,
जनपद-कन्नौज।



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