ऊँ नमः शिवाय
शिव जी रूप धरे मनहारी चन्द्रशेखर बन गये त्रिपुरारी
गले सर्पों की माला धारी ऊँ नमः शिवाय,
फूले नन्दी नहीं समाते सवारी भोले की बन जाते
मंथर डोल-डोल पग आते ऊँ नमः शिवाय,
भूत प्रेत संगी बाराती सज गये सज गये घोड़े हाथी
नैयनन को शोभा अति भाती, ऊँ नमः शिवाय,
सज गयीं दुल्हन गौरी मैया कर सोलह श्रृँगार सवैया
सृष्टि की है नाव खिवैया, ऊँ नमः शिवाय,
सारी सृष्टि है अरि से तारी भोले बन गये है अर्धनारीश्वर,
जन्मों के बन्धन से ऊपर ऊँ नमः शिवाय,
रचयिता
रीता गुप्ता,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कलेक्टर पुरवा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

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