महिला सशक्तीकरण 246, गीता वर्मा, उत्तराखंड


*महिला सशक्तिकरण विशेषांक-246*

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*मिशन शिक्षण संवाद परिवार की बहनों की संघर्ष और सफलता की कहानी-*

*(दिनांक-9 मार्च 2021)*
नाम- गीता वर्मा
पद - प्रधानाध्यापक
विद्यालय- रा0उ0प्रा0वि0- खतेड़ा
लोहाघाट, चम्पावत, उत्तराखंड
*सफलता एवं संघर्ष की कहानी*👉🏻
*नियुक्ति-*
प्रथम नियुक्ति *27-05 1987* में रा0प्रा0वि0 मझेड़ा, सी.आर.सी धौन( जिला चम्पावत)में हुई। *27-05-1987 से 15-10-90* तक मझेड़ा में कार्यरत रही।

*16-10-90 से 05-05-2001* तक स0अ0 के पद पर रा0प्रा0वि0 कफलांग में कार्यरत रही।
*05-05-2001* को प्र0अ0 के पद पर पदोन्नति (रा0प्रा0वि0 कठाड़ माफी, चम्पावत) हुई।
*30-06-2003 से 23-07-2020* को पुन: रा0प्रा0पा0 कफलांग में प्र0अ0 के पद में कार्यरत रही।
*24-07-2020* को रा0उ0प्रा0वि0 खतेड़ा में प्र0अ के पद पर पदोन्नति हुई। वर्तमान में इसी विद्यालय में कार्यरत हूं। मेरे अतिरिक्त विद्यालय में 04 शिक्षक कार्यरत हैं।

*विद्यालय व विद्यार्थियों की उपलब्धियां*
⭐️⭐️बच्चों में कौशल विकास एवं नई प्रतिभाओं को बढावा देना सदैव ही मेरा लक्ष्य रहा है, इस  मेरे द्वारा-
⭐️ प्रा0वि0 कफलांग में नियमित रूप से प्रायोगिक ज्ञान हेतु *बाल शोध मेलों* का आयोजन किया गया।  बाल शोध मेलों में बच्चों द्वारा *धूप-अगरबत्ती, घरेलू जड़ी-बूटियों* आदि को बनाने व उनके लाभ पर किये गये शोध सार्वाधिक सराहे गये।
🤾 बच्चों द्वारा *सांस्कृतिक, खेलकूद, सामान्य ज्ञान कार्यक्रमों* में भी जिला एवं राज्य स्तर पर *विशेष व द्वितीय स्थान* प्राप्त किया।

⭐️वर्ष *2002 से 2008* तक प्रतिवर्ष TLM प्रतिस्पर्धाओं में विद्यालय की पहुंच राज्य स्तर तक रही। TLM एवं रूचिकर शिक्षण हेतु नवाचार भी किया गया जो *राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा अभिप्रेरण* नामक पुस्तिका में दर्ज है।
⭐️पूर्व में विद्यालय के बच्चों का *जवाहर नवोदय में चयन* भी हुआ।
⭐️बच्चों में *व्यक्तिगत सफाई*  व *विद्यालय स्तर पर साफ सफाई* को बढ़ावा देने हेतु मेरे द्वारा पूर्व विद्यालय में मुहिम चलाई गयी। इस अभिभावकों मासिक गोष्ठियां आयोजित की गयी। इसके परिणामस्वरूप अभिभावकों के सहयोग से विद्यालय का *सौंदर्यीकरण* किया गया व *फुलवाड़ियों का निर्माण* भी किया गया व विद्यालय ने *स्वच्छ भारत अभियान के तहत प्रशस्ति पत्र भी प्राप्त किया*।
⭐️बच्चों की प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करने के लिये *प्रतिवर्ष विद्यालय में वार्षिकोत्सव*  आयोजित किया गया।
*विद्यालय की समस्याओं का समाधान-*
⭐️गांव के *दिव्यांग एवं अक्षम बच्चों* के विकास हेतु उनका सहयोग किया गया व उनका नामांकन *विशेष विद्यालय* में करवाया।
⭐️विद्यालय में आयोजित की जाने वाली गोष्ठियों में अभिभावकों की  सुनिश्चित करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी। अभिभावकों के मासिक गोष्ठियों में न आने के चलते बच्चों में साफ-सफाई की कमी, गृह-कार्य न करना, पढ़ाई में रूचि ना दिखाना, अनियमित उपस्थिति होना जैसी शिकायतें देखने को मिलती थी। विद्यालय के साथ-साथ ही अभिभावकों (खासकर माताओं) की भी बच्चों के विकास में अहम भूमिका है। इसको ध्यान में रखते हुये मेरे द्वारा विद्यालय में प्रति माह गांव की महिलाओं की गोष्ठी की जाने लगी। इसको ग्रामीण *माता सम्मेलन* का नाम दिया गया।  इसमें प्रत्येक महिला द्वारा हर माह 50 रुपये की धनराशि जमा की जाने लगी। इस प्रकार हर महिला प्रतिवर्ष 600 रूपये जमा करती। हर माह पर्ची सिस्टम के द्वारा किसी महिला का नाम चुना जाता और उनको 600 रुपये दे दिये जाते। इससे महिलाओं का प्रत्येक माह विद्यालय आना शुरू हुआ। इन गोष्ठियों में महिलाओं की आम-दिनचर्या पर चर्चा होती व उसके साथ ही उनको बच्चों की पढ़ाई के प्रति जागरूक भी किया जाता। इसके परिणामस्वरूप मात्र 6 महिनों में ही बच्चों में सुधार दिखने लगा। अब बच्चें प्रतिदिन साफ-सफाई के साथ विद्यालय आते व सदैव अपना गृहकार्य पूरा कर के लाते।
⭐️ विद्यालय में *साफ पीने के पानी*, *तार-बाड़* की लंबित समस्याका भी निस्तारण किया गया।
⭐️SMC की बैठकों में अभिभावकों को *कन्या भ्रूण हत्या*, *बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ* जैसे मुद्दों पर भी जागरूक किया जाने लगा। 
*शिक्षक की उपलब्धियां-*
*पुरस्कार-*
🏅वर्ष *2002* में जनपद स्तर पर *उत्कृष्ट कार्य* हेतु प्रशस्ति पत्र प्राप्त किया।
🏅वर्ष *2007* में *चम्पावत विकास संघ सेवा समिति* द्वारा अपने प्रयासों के लिय प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।
🏅वर्ष *2006-07* में *दक्षता पुरस्कार* प्राप्त।
🏅वर्ष *2007-08* में विशिष्ट कार्य हेतु *जिलाधिकारी- चम्पावत द्वारा उत्कृष्टता पुरस्कार* प्रदान किया गया।

🏅वर्ष *2008 में *उत्तराखंड त्तकालीन मुख्यमंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा राज्य शैक्षिक पुरस्कार* प्रदान किया ।
🏅वर्ष *2009 में *तत्कालीन राष्ट्रपति महोदया श्रीमती प्रतिभा पाटिल द्वारा राष्ट्रपति पुरस्कार* दिया गया।
🏅जनपद एवं राज्य स्तर पर वर्ष *2002 से 2008* तक प्रतिवर्ष TLM प्रदर्शनी में प्रतिभाग किया व *प्रथम एवं द्वितीय* स्थान प्राप्त किया।
*विश्व विकलांगता दिवस* पर संयुक्त *शिक्षा निदेशक* *(कुमाऊं)* द्वारा विद्यालय में किये गये प्रयासों के लिये प्रशस्ति पत्र भी दिया गया।
*छात्र उपस्थिति हेतु प्रयास*
रा0प्रा0वि0 कफलांग में कार्यरत रहने के दौरान एक बड़ी चुनौती यह भी थी कि गांव के अधिकांश बच्चों का विद्यालय में नामांकन ही नहीं था। इस विषय को गंभीरता से लेते हुये मैने प्रतिदिन स्कूल की छुट्टी के उपरांत गांव के *घर-घर भ्रमण* कर बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाने की बात करी। यह मेरे लिये स्वयं एक चुनौतीपूर्ण कार्य था और मैने इसे स्वीकार करने की ठानी। इस मुहिम में कुछ ग्रामवासियों का साथ भी मिला तो हिम्मत दोगुनी हुई। अंतत: हम सब बच्चों का दाखिला करवाने में सफल हुये। यही नहीं, इन बच्चों की उपस्थिति शत-प्रतिशत रहे यह भी सुनिश्चित किया।
*इनमें से कई बच्चे आज भी मिलते हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छा कर रहे हैं। उन्हें देख खुशी मिलती है। इस पूरे सफर के दौरान मैने प्रतिदिन स्वयं बच्चों से बहुत कुछ सीखा है। मुझे उम्मीद है कि मैं उनसे भविष्य में भी य़ूं ही सीखती रहूँ।*🙏🙏🙏🙏
*संकलन:-*
*टीम मिशन शिक्षण संवाद*

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