मैं नारी हूँ, पर ममता पर भारी हूँ
सृष्टि का सब भार समेटे,
नव जीवन का सार समेटे,
कन्या बन अवतारी हूँ।
मैं नारी हूँ.........
अति विशाल है आँचल मेरा,
करता है नभ तल का फेरा,
ममता बन अवतारी हूँ।
मैं नारी हूँ...........
शिवा बिना शिव रहे अधूरे,
पंचतत्व हों कैसे पूरे,
शक्ति बन अवतारी हूँ।
मैं नारी हूँ............
अष्टभुजा कर खडग विराजे,
नर दानव को चुनकर काटे,
दुर्गा बन अवतारी हूँ।
मैं नारी हूँ...........
कोई दिशा न रहे अछूती,
हर क्षेत्रों में बोले तूती,
कर्मा बन अवतारी हूँ।
मैं नारी हूँ.............
आज हो रहे भ्रूण परिक्षण,
कैसे होगा मेरा रक्षण,
क्या इतनी बेचारी हूँ।
मैं नारी हूँ.............
मानव ध्यान हृदय में तू धर,
बीज नष्ट तो कैसे तरुवर,
सृष्टि की संचारी हूँ।
मैं नारी हूँ, मैं नारी हूँ।
रचयिता
रीता गुप्ता,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कलेक्टर पुरवा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

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