मातृशक्ति

हे मातृशक्ति तू, दुनिया को जगा रही है।

दुनिया को करके जगमग, खुद को जला रही है।।


जीवन के हर मोड़ पर तेरी दर्द भरी कहानी।

जग को सँवारते-सँवारते बिता दी तूने जिन्दगानी।।

सब गमों को तू मुस्कराकर भुला रही है||


तेरा रूप है एक पर, अनेकों हैं कहानी।

प्यार, त्याग, ममता तू वीरता की निशानी।।

सृष्टि की तू गाथा, ये दुनिया बता रही है||


अवतार तेरा कुछ भी हो माँ, बहिन, पत्नी या बेटी।

कुल की तू है मर्यादा कुल की है तू देवी।।

तेरी ही रहमत से ये सृष्टि चल रही है||


प्रकाश पुँज दिवाकर सा, चीरती हो अंधियारा।

तेरी एक मुस्कान से खिलखिलाता जग सारा।।

अपने तेज से तू जग को दीप्तिमान कर रही है||


खुद को अबला मत कहना, तुम झाँसी की रानी हो।

आँखों में आँसू ना हो उनमें खौलता पानी हो।।

अपनी ही नजरों में तू खुद को  गिरा रही है 


रचयिता
अजय विक्रम सिंह, 
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मरहैया,
विकास क्षेत्र-जैथरा,
जनपद-एटा।



Comments

Total Pageviews