अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
नारी हो तुम, नारीत्व का अभिमान हो तुम
घर की लाज, घर का सम्मान हो तुम
ममता की मूरत हो, शक्ति की पहचान हो तुम
घर को रोशन करती, सूरज की किरण हो तुम
कभी दुर्गा कभी काली का रूप हो तुम
हर रूप- स्वरूप में, जग में छायी हो तुम
मन ही मन रोती हो, फिर भी सबको हँसाती हो तुम
सहेलियों संग मिलकर खूब अठखेलियाँ करती हो तुम
कभी दफ्तर, कभी परिवार, सबको सँभालती हो तुम
कौन कहता है, कमजोर हो तुम, घर की मजबूत नींव हो तुम
रचयिता
शिप्रा सिंह,
सहायक अध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय रूसिया,
विकास खण्ड-अमौली,
जनपद-फतेहपुर।

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