भोले भण्डारी
मेरे भोले भण्डारी,
आ जाओ त्रिपुरारी।
कानों में कुंडल बिच्छू के,
और गले सर्पों की माला।
डम डम डमरू बजा जाओ,
मेरे भोले भंडारी.......
मेरे भोले भण्डारी,
आ जाओ त्रिपुरारी।
माथे पे चन्दा दमक रहा,
और आसन है मृग की छाला।
त्रिशूल हाथों में लेकर आओ,
मेरे भोले भण्डारी.......
मेरे भोले भण्डारी,
आ जाओ त्रिपुरारी।
चाँद सितारे बने बाराती,
और नन्दी की सवारी।
संग गौरा को ले आओ।
मेरे भोले भण्डारी.....
मेरे भोले भण्डारी,
आ जाओ त्रिपुरारी।
जग में हाहाकार मची है,
हम दीन हैं आस लगाए।
संहार दुष्टों का करने आओ,
मेरे भोले भंडारी.......
मेरे भोले भण्डारी,
आ जाओ त्रिपुरारी।
रचनाकार
सपना,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय उजीतीपुर,
विकास खण्ड-भाग्यनगर,
जनपद-औरैया।

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