अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

अपनी प्रतिभा को मत छिपाओ 

तुम हो अपने मन की कस्तूरी।


लेखनी तुम काग़ज़ पर चलाओ

तम के पथ पर ज्योति जलाओ 


सुनहरी राह अपनी तुम्हीं बनाओ

घर-घर शिक्षा अलख जलाओ


नहीं विवश तुम अबला बेचारी 

तुम हो उच्च पदों की अधिकारी 


लगा पंख मुकाम तुम पाओगी 

अपनी किस्मत तुम्हीं बनाओगी


अब तोड़ो रुढ़ि प्रथा का घेरा

तोड़ो जंजीरें लिख दो नया सबेरा


तेरे निशानों पर चले सारी दुनिया

नाप लो कदमों से अंबर रे मुनिया


रचयिता
स्वाती सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रवांसी,
विकास खण्ड-परसेंडी,
जनपद-सीतापुर।



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