तेरे किस रूप को नमन करूँ
जब आँख खुली तो अपने को
माँ की गोदी में पाया।
दादी नानी बुआ आदि ने
मेरे जन्म का जश्न मनाया।।
बहिनों ने भी खेल-खिलौनों
से मेरा मन बहलाया।
बिना आपके एक क़दम भी
आगे न चल पाया।।
शिक्षा के मन्दिर में भी
मैंने तुमको ही पाया।
बड़े प्यार से आपने हमको
जीवन का पाठ पढ़ाया।।
कई बार डॉक्टर जी बनकर
मौत के मुँह से छुड़ाया।
जीवन के हर मोड़ पर तुमने
हँसकर साथ निभाया।।
घर में बाहर गली खेत में
तुम्हीं नजर आती हो।
कभी नहीं थकती जीवन में
हर दम मुस्काती हो।।
मै नन्हा सा बालक हूँ
मै अचरज में पड़ जाता हूँ।
कितने अनगिनती रूप तुम्हारे
समझ नहीं पाता हूँ।।
स्त्री अबला महिला नारी
ये तुम तो नहीं हो सकती।
इन सबसे ऊपर हो तुम कोई
ईश्वर की रची महाशक्ति।।
कैसे मै उपकार चुकाऊँ
और कैसे धन्यवाद करूँ।
इतने सारे रूप आपके
किस-किस रूप को नमन करूँ।।
मेरी इच्छा है हर जन्म में
तेरा ही आँचल पाऊँ।
अपने जीवन की क़ुर्बानी देकर
तेरा कर्ज चुकाऊँ।।
रचयिता
जमीला खातून,
प्रधानाध्यापक,
बेसिक प्राथमिक पाठशाला गढधुरिया गंज,
नगर क्षेत्र मऊरानीपुर,
जनपद-झाँसी।
माँ की गोदी में पाया।
दादी नानी बुआ आदि ने
मेरे जन्म का जश्न मनाया।।
बहिनों ने भी खेल-खिलौनों
से मेरा मन बहलाया।
बिना आपके एक क़दम भी
आगे न चल पाया।।
शिक्षा के मन्दिर में भी
मैंने तुमको ही पाया।
बड़े प्यार से आपने हमको
जीवन का पाठ पढ़ाया।।
कई बार डॉक्टर जी बनकर
मौत के मुँह से छुड़ाया।
जीवन के हर मोड़ पर तुमने
हँसकर साथ निभाया।।
घर में बाहर गली खेत में
तुम्हीं नजर आती हो।
कभी नहीं थकती जीवन में
हर दम मुस्काती हो।।
मै नन्हा सा बालक हूँ
मै अचरज में पड़ जाता हूँ।
कितने अनगिनती रूप तुम्हारे
समझ नहीं पाता हूँ।।
स्त्री अबला महिला नारी
ये तुम तो नहीं हो सकती।
इन सबसे ऊपर हो तुम कोई
ईश्वर की रची महाशक्ति।।
कैसे मै उपकार चुकाऊँ
और कैसे धन्यवाद करूँ।
इतने सारे रूप आपके
किस-किस रूप को नमन करूँ।।
मेरी इच्छा है हर जन्म में
तेरा ही आँचल पाऊँ।
अपने जीवन की क़ुर्बानी देकर
तेरा कर्ज चुकाऊँ।।
रचयिता
जमीला खातून,
प्रधानाध्यापक,
बेसिक प्राथमिक पाठशाला गढधुरिया गंज,
नगर क्षेत्र मऊरानीपुर,
जनपद-झाँसी।

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