नारी का स्वरुप

समर्पित सब किया जिसने,
पति परिवार को अपना।
खुशी में खुश दुखी रहकर भी,
नहीं दुख दे सकी उतना।

प्रेम, करुणा, दया, ममता,
हो निश्छल कट गया जीवन।
छँटे जब गम के बादल,
खुशियों से पूरा किया सपना।

नमन उन नारियों को हैं,
जिन्हें सम्मान भी न मिला।
सहृदयी मातृ शक्ति थीं,
सभी ममतामयी सिला।

आज हम याद करते उनको,
उनके शौर्य कर्मों को,
सामने हुई खड़ी तो देख,
दुश्मन का भी दम निकला।

आज की नारी शक्ति है,
न अबला हैं न बिचारी है।
करे उत्कृष्ट कार्य दृढ़ हो,
न दिखती उसमें लाचारी हैं।

उड़ाती वायुयानों को,
ले बोझ कंधों पर जीवन का।
शिशु आराम दिए छोड़ चली,
राह जहाँ भागीदारी हैं।
                         
रचयिता
श्रीमती नैमिष शर्मा,
बी0आर0पी0,
विकास खंड-मथुरा,
जिला-मथुरा।
उत्तर प्रदेश।

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