थोड़ा सा मुस्कराइए
उनको स्टूडेंट नहीं मित्र बनाइये
कक्षा में जाते ही थोड़ा मुस्कराइए
कुछ से हाथ मिलाइये
कुछ को गले लगाइये।
कुछ उनकी भी सुनिए
फिर अपनी सुनाइए।
कुछ अनुशासन
कुछ उन्मुक्त माहौल में।
उनकी रूचि के अनुसार
उनको पढ़ाइये।।
इस तरह उनका ही नहीं
उनके माता-पिता का भी
स्नेह और सम्मान पाइए।
क्योंकि शिक्षार्थी से ही
शिक्षक का वज़ूद है
इसलिये कुछ अपना भी
गौरव बढ़ाइए।।
निष्काम कर्म करें कुछ
इस तरह कि
उनकी आँखों में अपना
ही अक्स पाइए ।।
बस थोड़ा सा मुस्कराइए।।
रचयिता
जमीला खातून,
प्रधानाध्यापक,
बेसिक प्राथमिक पाठशाला गढधुरिया गंज,
नगर क्षेत्र मऊरानीपुर,
जनपद-झाँसी।
कक्षा में जाते ही थोड़ा मुस्कराइए
कुछ से हाथ मिलाइये
कुछ को गले लगाइये।
कुछ उनकी भी सुनिए
फिर अपनी सुनाइए।
कुछ अनुशासन
कुछ उन्मुक्त माहौल में।
उनकी रूचि के अनुसार
उनको पढ़ाइये।।
इस तरह उनका ही नहीं
उनके माता-पिता का भी
स्नेह और सम्मान पाइए।
क्योंकि शिक्षार्थी से ही
शिक्षक का वज़ूद है
इसलिये कुछ अपना भी
गौरव बढ़ाइए।।
निष्काम कर्म करें कुछ
इस तरह कि
उनकी आँखों में अपना
ही अक्स पाइए ।।
बस थोड़ा सा मुस्कराइए।।
रचयिता
जमीला खातून,
प्रधानाध्यापक,
बेसिक प्राथमिक पाठशाला गढधुरिया गंज,
नगर क्षेत्र मऊरानीपुर,
जनपद-झाँसी।

कविता के माध्यम से गुणवत्ता सुधार का बेहतरीन मंत्र
ReplyDeleteबहुत सटीक और अच्छा प्रयास
लिखतें रहें......
ढे़र सारी शुभकामनाएं!