राज्यस्तरीय कार्यशाला,महोबा
राज्य स्तरीय शैक्षिक उन्नयन कार्यशाला, महोबा
दिनांक 28 एवं 29 को आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला से हमने सबकी प्रस्तुति के आधार पर कुछ नवाचार नोट किए जो सभी के द्वारा अपनाए जा सकते हैं--
*पहला अनुकरणीय नवाचार*
जनपद शाहजहांपुर की प्रस्तुति के आधार पर एक नवाचार अनपढ़ अभिभावकों को अपने बच्चों की दैनिक प्रगति परखने के लिए अध्यपकों द्वारा तीन रंगों के पेन का प्रयोग किया जाना!!
नीले रंग के पेन का प्रयोग बच्चों की सामान्य प्रगति (average), लाल रंग का प्रयोग ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता(not good) तथा हरे रंग का प्रयोग (very good) अर्थात संतोष जनक स्थिति को दर्शाता है जिसे अभिभावक आसानी से समझ सकते हैं!!
*पहला अनुकरणीय नवाचार*
जनपद शाहजहांपुर की प्रस्तुति के आधार पर एक नवाचार अनपढ़ अभिभावकों को अपने बच्चों की दैनिक प्रगति परखने के लिए अध्यपकों द्वारा तीन रंगों के पेन का प्रयोग किया जाना!!
नीले रंग के पेन का प्रयोग बच्चों की सामान्य प्रगति (average), लाल रंग का प्रयोग ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता(not good) तथा हरे रंग का प्रयोग (very good) अर्थात संतोष जनक स्थिति को दर्शाता है जिसे अभिभावक आसानी से समझ सकते हैं!!
*दूसरा अनुकरणीय नवाचार* गोरखपुर से जिनके द्वारा अपने विद्यालय में अटेंडेंस के दौरान बच्चों को उनके अनुक्रमांक का वर्ग एवं घन बोला जाना जिससे कि बच्चे संख्याओं का वर्ग एवं घन प्रतिदिन के अभ्यास से जुबानी याद कर सकते हैं!!!
*तीसरा अनुकरणीय नवाचार* जनपद एटा की प्रस्तुति से उनके द्वारा अपने विद्यालय में बच्चों द्वारा पेज बर्बाद से बचाने को किया गया प्रयास जिसमे वो प्रतिदिन कॉपियां के निरीक्षण के समय प्रत्येक बच्चे की कॉपी में बिस्किट या टॉफ़ी सिंबल बना , महीने के अंत में सभी सिम्बलों को गिनकर उतने ही टॉफ़ी एवं बिस्किट का दिया जाना!!
बच्चे ज्यादा से ज्यादा टॉफ़ी या बिस्किट पा सके इस हेतु अपनी कॉपी का यदि पन्ना गलती से फट भी जाए तो उसे स्वयं जोड़ कर रखते हैं।।
बच्चे ज्यादा से ज्यादा टॉफ़ी या बिस्किट पा सके इस हेतु अपनी कॉपी का यदि पन्ना गलती से फट भी जाए तो उसे स्वयं जोड़ कर रखते हैं।।
श्यामपट्ट कार्य का चार्ट में प्रतिदिन का संकलन भी अनुकरणीय कार्य था!!
*चौथा अनुकरणीय नवाचार* जनपद झाँसी से खातून mam द्वारा अपनाए जा रहे विद्यालय की बेटियों की शादियों के आमंत्रण के दौरान सभी बेटियों को एक साड़ी एवं 501 ₹ आशीर्वाद स्वरुप देकर विद्यालय प्रांगड़ में उन्ही के नाम से एक पेड़ का रोपित किया जाना!!
इन चार पांच नवाचारी प्रयासों ने हमे आकर्षित किया!!
ललितपुर के *नीरज तिवारी* जी इस कार्यशाला की खोज कहे जा सकते हैं क्योंकि इसके पहले इनके TLM से लोग अनभिज्ञ थे!!
स्वरांजलि के कांसेप्ट के साथ आयोजित ये कार्यशाला शानदार एवं सफल रही है!!!
हम सभी को बस केवल आदत को बदलने की ज़रूरत है कि अपने प्रयासों की प्रस्तुति के बाद सभी के प्रयासों की प्रस्तुति भी अच्छे श्रोता की तरह सुननी चाहिए !!!!
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