राज्यस्तरीय कार्यशाला ,महोबा 28,29 जनवरी 2019

आस्था के कुम्भ से ज्ञान के कुंभ की ओर



26 जनवरी दोपहर 12 बजे उल्लास, उत्साह से भरे चल पड़े  ज्ञात से अज्ञात की ओर।
जी हाँ बात हो रही है शिराज-ए-हिन्द,महर्षि यमदग्नि की तपोभूमि.... जहाँ की मूली गिनीज बुक में और इमरती विश्व प्रसिद्ध है जौनपुर से गोरखगिरी पर्वत को समेटे वीरधरा महोबा की यात्रा की।
प्रचण्ड ठण्ड से मुकाबिल उत्तरायण सूर्य अपने मद्धम रवि रश्मियों से कुछ राहत दे रहे थे। वहीं प्रेमचन्द की पूस की रात की याद दिलाती यामिनी कुल मिलाकर प्रतिकूलता... लेकिन अंदर से उमड़ता उत्साह भारी था।
बात हो रही है महोबा में मिशन शिक्षण संवाद के बैनर तले आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला  की।
यूँ तो कार्यशाला दो दिवसों को थी जो 28 को शुरू होकर 29 को खत्म होती किंतु मन महोबा के ज्ञान कुम्भ में सिंचित होने से पूर्व प्रयागराज त्रिवेणी संगम पर चल रहे अध्यात्म, धर्म, मोक्ष के दिव्य कुम्भ से भी अभिसिंचित होना चाहता था।।
तो जरूरी सामान रख निकल पडे 70वें गणतंत्र की शुभकामनाओं के बीच संगम की रेती पर बसे शहर का हिस्सा  बनने को।।
अद्भुत अलौकिक, अनुपम, अद्वितीय, छटा एक ओर श्रद्धालुओं से अटे पड़े रेत पर बने रास्ते दृष्टिगोचर हो रहे थे वही दूसरी ओर सन्त महात्माओं के अखाड़ों, शिविरों पर फहराती धर्म ध्वजा जो मानो उद्घोष कर रही थी धर्मो रक्षति रक्षितः
सुन्दर व्यवस्था, भरपूर स्वछता के बीच जहाँ कभी ब्रह्मा ने यज्ञ किया था वह पुण्य भूमि जहाँ गिरी अमृत बूँदें आर्य संस्कृति का उद्घोष करती हुई सम्राट हर्ष की दानशीलता को स्मरण करा रही थी वहीं वर्तमान  सरकार की आस्था एवम सुप्रबन्धन मन मोह रहा था।
नैनी अरैल से फाफामऊ तक विस्तार था.... हर ओर धार्मिक क्रियाकलापों के साथ हर व्यक्ति पुण्य की डुबकी लगाने को बेताब। हम भी अपने पूर्वजों को स्मरण करते हुए निर्मल शीतल जल में डुबकी लगाकर अपनी और अपनों की मंगल कामना करते हुए प्रवासी पक्षियों के सौंदर्य को आंखों में बसाये चल पडे वीर भूमि महोबा की ओर ज्ञान के कुंभ में डुबकी लगाने...
प्रयाग से शुरु प्रीतिमय यात्रा में हमसफ़र बनी काशी की छवि और राह के पथ प्रदर्शक बने भाई विनोद जी संग बड़ी बहन स्वरूपा उषा दीदी और हमारी छुटकी ज्योति।
रास्ते मे महान कवि तुलसी दास जी का गाँव राजापुर भी पड़ा जहाँ हमने दर्शन पूजन किये और वहाँ से आगे बढ़ चले कौशाम्बी से अनुज दीप सर भी हम सबके साथ हो लिये जो आगे हमारी अनजान राह के दीप बने। अगला पड़ाव चित्रकूट था जहाँ के कण कण में भगवान श्री राम का चित्र परिलक्षित होता है।
अनगिनत बार चित्रकूट आना हुआ है पर आज भी मन मोह लेता है चित्रकूट मन ही मन वहाँ की पावन भूमि को प्रणाम कर कामद गिरि का ध्यान कर हम सभी भाई विनोद जी द्वारा प्रायोजित चाय समोसे का उर्जित अल्पाहार लेकर अब बिना रुके वीर भूमि महोबा के लिये निकल पड़े। वहाँ पहुँचते ही उम्मीद से ज्यादा स्वागत और अपनापन लिये गेट पर ही महोबा के शिक्षक भाई बहन मिले और बहुत गर्मजोशी से हम सभी का स्वागत सत्कार किया।
कुशल क्षेम व स्वादिष्ट भोजन के उपरान्त सब अपने निर्धारित स्थान पर शयन को गये।

सुन्दर बैठक व्यवस्था 

टीम का हर सदस्य अपने निर्धारित कार्य एवं लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पित और इतना प्रतिबद्ध कि पहली ऐसी कार्यशाला देखी जहाँ अतिथि भी अनुशासित दिखे। निर्धारित समय पर शुरु हुआ ज्ञान का कुंभ।
कार्यक्रम का शुभारंभ महोबा के जिलाधिकारी द्वारा माँ सरस्वती की अर्चना से हुआ और महोबा की एक बहन ने सुन्दर सरस्वती वंदना की। कार्यक्रम के संचालन की बागडोर.... जी के हाथों मे थी जिन्होने लाजवाब संचालन किया।
जनपद महोबा के एडमिन जी ने आये हुये सभी विशिष्ट अतिथियो का हमारी भारतीय परम्परा के अनुसार कुमकुम चावल से चन्दन लगाकर स्वागत किया और मुझे मिली स्वागत गीत गाने की जिम्मेदारी जिसको निभाने की मैने भरपूर कोशिश की। उसके बाद शुरु हुई ज्ञान की कुंभ की अद्भुत बेमिसाल प्रदर्शनी। पीपीटी के माध्यम से प्रदेशभर से आए सभी नवाचारी शिक्षकों का अपने विद्यालय में किए गए नवाचारों का अद्भुत अतुलनीय प्रदर्शन  हम सभी लाजवाब थे एक से बढ़कर एक पीपीटी प्रदर्शित की जा रही थी हर प्रदर्शन में हमें कुछ न कुछ नया सीखने को मिल रहा था।
मैं खुद को खुशनसीब समझ रही थी कि इस विशाल ज्ञान के कुंभ में गोता लगाने का मुझे मौका मिला। इसी दौरान अनेक शिक्षक भाई बहनों से परिचय भी हुआ और उनको जानने समझने का मौका मिला सच कहूँ तो ऐसा लग रहा था जैसे यह  शिक्षकों का कार्यक्रम न हो करके किसी परिवार के पारिवारिक उत्सव का आयोजन हुआ है जिसमें परिवार के सभी लोग इस उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे थे और परिवार का हर सदस्य अपने अपने कार्य को पूरी तरह से अंजाम देने में मुस्तैद था।
तय समय पर मध्यावकाश हुआ और सभी लोग भोजन करने गये।
भोजन व्यवस्था भी ऐसी सभी सम्मानित शिक्षक भाई बहन स्वयं से पंक्तिबद्ध होकर भोजन की लाइन में लगे थे और मैं आश्चर्य चकित थी क्योंकि लगभग 200 से ज्यादा लोगों को गर्मागर्म घर की तरह रोटियाँ परोसी जा रही थी
बेहद शानदार व्यवस्था....  महोबा के भाई बहनो ने पहले दिन ही हृदय मे अमिट छाप छोड़ दी थी।
सुस्वादु भोजन से तृप्त होकर हम सभी ऑडिटोरियम मे आ गये बाकी शिक्षक भाई बहनों का presentation देखने।
शाम 6.00 बजे पहले दिन की प्रस्तुति समाप्त हुई और 7.00 बजे बेसिक की कविताएँ स्वरान्जलि सन्ध्या का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम शुरु हुआ जिसमे हृदयेश सर का भावविह्वल कर देने वाला एकल अभिनय "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ", उदय सर, छवि, सुनमलता मैम...  इत्यादि के साथ मुझे भी संगीतमय प्रस्तुति करने का मौका मिला।
अतिथि गण लाजवाब थे हम नवाचारी शिक्षको के इस बेजोड़ नवाचार को देखकर सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
इसके पश्चात रात्रि 10.00 बजे सभी स्वादिष्ट भोजन करने के उपरांत अपने निर्धारित स्थान पर सुबह समय से आने के लिए प्रस्थान कर गये।
दूसरे दिन कार्यक्रम 10:00 बजे से अपने निर्धारित समय पर शुरू हो गया और फिर चली एक से बढ़कर एक हिट पीपीटी प्रस्तुति
3 बजे से महोबा हमीरपुर के सांसद एडी बेसिक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महोबा की उपस्थिति में पुरस्कार और प्रमाण पत्र वितरण समारोह कभी वीर भूमि कॉलेज के टॉपर रहे सर्वश्रेष्ठ सांसद के विस्तार से सम्मानित जनपद हमीरपुर और महोबा के सांसद जी के कर कमलों से माँ सरस्वती की पूजा अर्चना हुई और मुझे संस्कृत में सरस्वती वंदना गाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ तत्पश्चात आए हुए गणमान्य अतिथियों के ओजस्वी उद्बोधन से हम लोग अभी सिंचित हुए उर्जित हुए आदरणीय शिक्षक भाई ओमवीर जी की शानदार विद्यालय व्यवस्था और नवाचारी गतिविधियों से युक्त पीपीटी देखकर गणमान्य अतिथि भी अपने आपको प्रशंसा करने से नहीं रोक पाए और सब ने एक स्वर से कहा कि बेसिक बदल रहा है मिशन के सभी सिपाहियों का पुरजोर सम्मान हुआ। इस मिशन की भव्य कल्पना को साकार रूप देने वाले मिशन शिक्षण संवाद के प्रणेता संस्थापक नेतृत्व करता पिता समान बड़े भाई आदरणीय श्री विमल भैया के आशीर्वचन एवं ओजस्वी वचनों से लाभित होने का मौका भी मिला। 2 दिन की सुंदर शानदार सराही गई प्रस्तुतियों के बीच अब समय बढ़ चला विराम की ओर...
यूँ तो मिशन की यात्रा अविराम है किंतु महोबा से रुखसत होने का वक्त आ गया था।
समारोह के समापन के क्रम में कार्यक्रम को साकार रूप देने में लगे मिशन महोबा की टीम  के सभी सदस्यों का महोबा के एडमिन द्वारा  सराहना की गई  उन्होंने जब कहा कि "मैं शरीर हूँ और यह सभी मेरे अंग है" तो मुझे अपने पापा के मुँह से कही गई रामायण की वह चौपाई याद आ गई 
"मुखिया मुख सो चाहिए खान पान को एक
पाले पोसे सकल अंग तुलसी सहित विवेक"

निश्चित रूप से इस पूरे शानदार कार्यक्रम के आयोजन में वीर भूमि महोबा के एडमिन श्री सुरेश सोनी जी एवं देवेश खरे जी का विवेक भरा लाजवाब सोच-समझ से परिपूर्ण सख्त एवं अनुशासित प्रबंधन रहा है।
एडमिनद्वय को  शानदार आयोजन से इस प्रयोजन को ऊँचाई देने के लिए आभार
कुशल मंच संचालक कार्यक्रम को चार चाँद लगा देता है इसका बखूबी एहसास करा रहे श्री *साकेत बिहारी शुक्ल* जी को,
आयोजक मंडल -
डॉ0 खुर्शीद हसन, सुरेश सोनी ,देवेश खरे, सुनील पाठक, अनन्त तिवारी, हृदयेश गोस्वामी, प्राणेश जी, राजकुमार शर्मा, साकेत बिहारी शुक्ला, राम नारायन पांडेय, अंजू गुप्ता, वीरेंद्र परनामी, बाबूराम चक्रवर्ती, उदय करन राजपूत,अभिषेक पुरवार,देवेश खरे जी
सहित पूरी टीम तथा महोबा सहित यादों को सहेज रहे छायाकार बबलू सोनी (फ़ोटो वाले भैया)जी को बहुत बहुत आभार एवं साधुवाद ।
सफ़लतापूर्वक समस्त कार्यक्रम सम्पन्न होने के पश्चात भारी मन से दुबारा फ़िर मिलने और अपने कर्म पथ पर आगे बढ़ने के लिये मिली नई उर्जा से लबरेज होकर हम सब अपने अपने गन्तव्य की ओर चल पड़े।
आते वक़्त गाडी मे बैठने पर वीर महोबा की भूमि पर मिले प्रेम और आतिथ्य को याद करते करते ये दो पंक्तियाँ --
रोम रोम पुलकित मन भाव विह्वल हुआ जाता है
निःशब्द है... लगता है कुछ छूटा हुआ जाता है
वीर भूमि महोबा के भाई बहनों का आतिथ्य,  प्रेम निष्ठा समर्पण अनुशासन भुलाये नहीं भूलेगा ।
hats off team महोबा।
सच कहें...  दिल भर आया जाते वक़्त
बहुत कुछ ले कर .... सीख कर जा रहे साथ आप सबसे

साभार:-
प्रीति श्रीवास्तव
जौनपुर 

संकलन:-
टीम मिशन शिक्षण संवाद

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