भारत को और महान करो

चींटी ऊँचा पर्वत चढ़ती,
मछली सागर का तल नापे।
पंछी उड़ते हैं नील गगन
फिर क्यूँ बन्दे तू मुँह ताके।

तू भी चढ़ जा, तू भी उड़ जा
चमको जग में सूरज बनके।
मुश्किल टकराकर गिर जाए 
तुम खड़े रहो     पर्वत बन के

राणा प्रताप से वीर बनो,
अबला नारी के चीर बनो,
तुम बनो राजगुरु, भगत सिंह
अन्यायी पर शमशीर बनो।

भारत माँ के सिरमौर बनो,
तुम भव्य सुनहरा दौर बनो,
तुम आप बनो इक उदाहरण
क्यों कहना कि कुछ और बनो।

तुम सच का अनुसंधान करो,
लो धनुष लक्ष्य संधान करो,
अज्ञान तिमिर में हो प्रकाश,
तुम ऐसा नवल विहान करो।

अब्दुल कलाम, सी.वी.रमन
ओ आर्यभट्ट की संतानों,
अपने कर्मों से, उद्यम से,
भारत को और महान करो।

भारत को और महान करो।।
भारत को और महान करो।।

रचयिता
निशा राय,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय शिवपुर, 
विकास खण्ड-खोरबार,
जनपद-गोरखपुर।

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