झिलमिल की साईकल

हट जा पिहू हटो आशी
दूर हो जा माइकल,
देख हवा सी दौड़ रही
झिलमिल की साईकल।।

पहिये आगे बढ़ रहे
जम ज़मी पर लड़ रहे
तलवा पकडे पैंडल का
जब तेज़ लगाया बल,
झिलमिल की साईकल।।

ब्रेक लगाया रुक गयी
थोड़ी आगे झुक गयी
मम्मी कहती दूध को
कहती पिऊँगी कल,
झिलमिल की साईकल।।

पिहू बैठी पीछे
खूब बढ़ी रफ़्तार,
बारी अब किसकी होगी
लो हो गयी तकरार,
दे चॉकलेट एक को
कुछ यूँ किया हल,
झिलमिल की साईकल।।

रचयिता
योगेश कुमार,
सहायक अध्यापक,
नंगला काशी 
विकास खण्ड-धौलाना,
जनपद-हापुड़।

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