मैं भारत का शिक्षक

बना हूँ ऐसी मिट्टी से, दुश्मन को सर न झुकाता हूँ,
सच्चा भारतीय शिक्षक हूँ, मैं उन्नत राष्ट्र बनाता हूँ।

बोता हूँ, शिक्षार्थियों के हृदय में, देश प्रेम का बीज,
वतन पर जान लुटाने वाले, योद्धा मैं ही बनाता हूँ।

सत्यमार्ग, कुमार्ग में फ़र्क, बहुतों को मालूम नहीं है,
ज्ञान का दीप जला, सबको सुमार्ग मार्ग दिखाता हूँ।

मातृभूमि पे संकट आये तो, कर में शस्त्र उठाता हूँ,
माँ को सर्वस्व अर्पण कर, पुत्र का फ़र्ज़ निभाता हूँ।

वतन को पड़े जरूरत तो, मैं चाणक्य बन जाता हूँ,
चंद्रगुप्त को सत्ता सौंप, मैं आदर्श गुरु कहलाता हूँ।

हिंद की पावन मिट्टी का, मस्तक तिलक लगाता हूँ,
भारत माँ का सेवक हूँ, जय हिंद जय हिंद गाता हूँ।

मेरे हृदय में क्षमा तो है, पर दुर्भावना बिल्कुल नहीं,
मानवता क्या होती है, मैं दुनिया को सिखलाता हूँ।

बना हूँ ऐसी मिट्टी से, दुश्मन को सर न झुकाता हूँ,
सच्चा भारतीय शिक्षक हूँ, मैं उन्नत राष्ट्र बनाता हूँ।

रचयिता
प्रदीप कुमार,
सहायक अध्यापक,
जूनियर हाईस्कूल बलिया-बहापुर,
विकास खण्ड-ठाकुरद्वारा,
जनपद-मुरादाबाद।

विज्ञान सह-समन्वयक,
विकास खण्ड-ठाकुरद्वारा।

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