वह गुरु है

हर ले हृदय का जो तम,
बनकर प्रकाश पुंज,
भर दे जो जीवन में,
नई तरंग,
वह गुरु है।
कंटकों के बीच जो,
राह बनाये,
अज्ञान रूपी तम को हर,
खोल दे ज्ञान रूपी चक्षु को,
वह गुरु है।
नन्हें पौधे की तरह पुष्पित करे, पल्लवित् करे,
नव सृजन करे,
नव अविष्कार करे,
वह गुरु है।
अचेतन को चेतन करे,
अँधियारो में जो राह दिखाये,
बनकर पथ प्रदर्शक,
कर दे जो जीवन का,
हर पल निर्मल,
वह गुरु है।
बने जो प्रेरणा स्त्रोत,
भरे जो साहस,
बनाये रखे जो,
जीवन की जीवंतता को,
दे शक्ति,
कुछ कर गुजरने को,
वह गुरु है।।

रचयिता                                  
चंचला पाण्डेय,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मसीरपुर, 
विकास खण्ड-बिलरियागंज, 
जनपद-आज़मगढ़।

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