स्वच्छ रहें, स्वस्थ रहें

देश हमारा, प्रदेश हमारा,
क्यों न इसको स्वच्छ बनाएँ?
औरों का मुँह, ताक-ताककर,
हम क्यों अपना समय गवाएँ।
बबली, बिट्टू को हो गया बुखार,
गंदगी का उसके घर पर अंबार।
इनसेफ्लाइटिस को देकर न्यौता,
पूरा गाँव चैन से  सोता।
आज हमें ये प्रण हैं करना,
शूकर, श्वान से दूर ही रहना।
गढ्ढे में पानी नहीं जमा करना,
गंदगी से दूर ही रहना।
भोजन सदा हाथ धोकर ही खाना,
वर्ना पीछे पडेगा पछताना।
गर मक्खी मच्छर भागेंगे,
तभी हम स्वस्थ रह पाएँगे।
बुख़ार का डर न होगा हमको,
डेन्गू, इन्सेफेलाइटिस छू न पायेगा तन को।

रचयिता
सुप्रिया मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गंगा पिपरा,
विकास क्षेत्र-खजनी,
जनपद-गोरखपुर।

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