हरियाली का दूत 'रमइया'

कक्षा-5 की कलरव के पाठ 7 पर आधारित

प्यारे बच्चों सुनो ध्यान से
सुन्दर कथा रमइया की
कोई कहता उसे जुनूनी
कोई कहता था सनकी

दूध बेचने वाला था वो
सपना था बस एक
सारी धरती हरी-भरी हो
सभी लगाएँ पेड़

साइकिल पर रख ढेरों पौधे
घूम-घूमकर बाँटे
जन्मदिवस, शादी पर देता
पौधों की सौगातें

बचपन में सरजी की बातें
याद रहीं जीवन-भर
"पेड़ों की कीमत होती है
पैसों से भी बढ़कर"

शुद्ध हवा, फल-फूल, छाँव, सब
देते पेड़ कमाल
बदले में हमसे चाहें बस
थोड़ी देखभाल

एक बार उसकी बेटी के
दर्द हुआ था सिर में
क्योंकि विद्यालय के बच्चे
बाहर धूप में पढ़ते

तभी रमइया ने ठाना था
ढेरों पेड़ लगाये
ताकि पेड़ों की छाया में
बच्चे ठण्डक पायें

उस दिन से ही बना रमइया
हरियाली का दूत
जहाँ-जहाँ जाता, करता
लोगों को जागरूक

पेड़ों के महत्त्व को उसने
यूँ भी था समझाया
बेटी-बेटा की शादी में
कार्ड पर छपवाया

सबको प्रेरित करे रमइया
इस नारे का किया प्रचार
धरती का अब करो श्रृंगार
पेड़ लगाओ सब दो-चार

रचनाकार
प्रशान्त अग्रवाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय डहिया,
विकास क्षेत्र फतेहगंज पश्चिमी,
ज़िला-बरेली (उ.प्र.)

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