एक विद्यार्थी का मर्म

मुझको जीना सीखा दे गुरुवर मेरे
ज़िन्दगी तू सजा दे गुरुवर मेरे

दर्द मेरा समझ पायेगा ना कोई
तू ही मुझको हँसा दे गुरुवर मेरे

मेरे माता-पिता जानते ही नहीं
उनको पढ़ना सीखा दे गुरुवर मेरे

उनको तो चाहिए मुझसे पैसा बहुत
मुझसे मजदूरियाँ वो कराते कभी

तू ही उनको बता महत्व शिक्षा का अब
उनको भी तू पढ़ा दे गुरुवर मेरे

मेरी इच्छा है छू लूँ गगन को सुनो
दूर और जाऊँ मैं आसमानों से दूर

क्या करूँ कुछ बता दे गुरुवर मेरे
मुझको जीना सीखा दे गुरुवर मेरे

रचयिता
सीमा गोहर,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय भवानीपुर, 
विकास खण्ड-सैदनगर
जनपद-रामपुर।

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