कर्त्तव्य से डिगें नहीं
कर्त्तव्य से डिगें नहीं सौगंध है हमें,
ये पग कभी रूकें नहीं सौगंध है हमें।
भारत हमारा देश है, जान हमारी
इससे अलग नहीं कोई पहचान हमारी,
सर देश का झुके नहीं सौगंध है हमें,
ये पग ़़़़़
शिक्षा जगत में आये हैं कुछ काम करेंगे,
हम देश के भविष्य का निर्माण करेंगे,
ये दीप अब बुझे नहीं सौगंध है हमें,
ये पग कभी ़़़़़
अपने लिए ही जी रहे हैं रोज-रोज हम,
कुछ तो निभा लें दोस्तों मानवता का धरम,
दिल हमसे ना दुखे कोई सौगंध है हमें,
ये पग कभी रूकें नहीं सौगंध है हमें,
कर्त्तव्य से डिगें नहीं सौगंध है हमें,
ये पग कभी रूकें नहीं सौगंध है हमें।
रचयिता
पीयूष त्रिवेदी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भैनामऊ,
विकास खण्ड-सुरसा,
जनपद-हरदोई।
ये पग कभी रूकें नहीं सौगंध है हमें।
भारत हमारा देश है, जान हमारी
इससे अलग नहीं कोई पहचान हमारी,
सर देश का झुके नहीं सौगंध है हमें,
ये पग ़़़़़
शिक्षा जगत में आये हैं कुछ काम करेंगे,
हम देश के भविष्य का निर्माण करेंगे,
ये दीप अब बुझे नहीं सौगंध है हमें,
ये पग कभी ़़़़़
अपने लिए ही जी रहे हैं रोज-रोज हम,
कुछ तो निभा लें दोस्तों मानवता का धरम,
दिल हमसे ना दुखे कोई सौगंध है हमें,
ये पग कभी रूकें नहीं सौगंध है हमें,
कर्त्तव्य से डिगें नहीं सौगंध है हमें,
ये पग कभी रूकें नहीं सौगंध है हमें।
रचयिता
पीयूष त्रिवेदी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भैनामऊ,
विकास खण्ड-सुरसा,
जनपद-हरदोई।

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