परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा
परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा
कारगिल का शेर
जन्म दिवस पर खास
वीरता की आन-बान देश का अभिमान,वीर विक्रम बत्रा की कहानी सुनाते है।
कारगिल का शेर, मारा शत्रुओं को घेर-घेर, शहीद 24 साल की जवानी बताते हैं ।।
सिक्स दिसम्बर सन उन्नीस सौ सन्तानबे पहली पोस्टिंग सोपोर
में हुई थी।।
13 जम्मू कश्मीर राइफल में लेफ्टिनेंट पद पर पहली नियुक्ति
मिली थी।
कमांडो की ट्रैनिंग लिया 1999, 1 जून को कारगिल मोर्चा संभाला था।
हम्प, राकी, नाब स्थानों को जीत लिया कायर शत्रुओं का दिवाला निकाला था।
सबसे महत्त्वपूर्ण थी 5140 चोटी उसे पाक सेना से मुक्त करवाया था।
सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर, 20 जून को कारनामा कर दिखाया था।
ये दिल माँगे मोर वे कहते थे बार-बार यही उदघोष उनके दिल मे समाया था।
5140 चोटी को जब वे फतह किये,सेना से कोड नाम शेरशाह पाया था।
अगले दिन 4875 वीं चोटी पर, विक्रम बत्रा ने तिरंगा फहराया था।
कायर पाकिस्तानी हथियार छोड़ भाग चले, रण में कालदूत विक्रम बली आया था।
7 जुलाई को लड़ाई के ही दौरान घायल अवस्था मे लेफ्टिनेंट नवीन थे।
उनको बचाने को दौड़े थे आप और छाती में गोली खाये तीन-तीन थे।
अंतिम उद्घोष जय माता दी कहके भारत का दुलारा विक्रम वीरगति पाई थी।
शौर्य, साहस, वीरता की अनुपम मिशाल बन भारत माता के चरणों मे ज्योति ये समाई थी।
या लहराते तिरंगे के पीछे आऊँ
या तो तिरंगे में लिपटा हुआ आऊँगा
पर आऊंगा जरूर जरूर मैं आऊँगा ।।
15 अगस्त सन उन्नीस सौ निन्यानबे, मरणोपरांत परमवीर
चक्र पाए थे।
ऑपरेशन विजय का परम विजेता वीर तिरंगे को मान को आप बढ़ाये थे।
रचयिता
राजकुमार शर्मा,
प्रधानाध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय चित्रवार,
विकास खण्ड-मऊ,
जनपद-चित्रकूट।
कारगिल का शेर
जन्म दिवस पर खास
वीरता की आन-बान देश का अभिमान,वीर विक्रम बत्रा की कहानी सुनाते है।
कारगिल का शेर, मारा शत्रुओं को घेर-घेर, शहीद 24 साल की जवानी बताते हैं ।।
सिक्स दिसम्बर सन उन्नीस सौ सन्तानबे पहली पोस्टिंग सोपोर
में हुई थी।।
13 जम्मू कश्मीर राइफल में लेफ्टिनेंट पद पर पहली नियुक्ति
मिली थी।
कमांडो की ट्रैनिंग लिया 1999, 1 जून को कारगिल मोर्चा संभाला था।
हम्प, राकी, नाब स्थानों को जीत लिया कायर शत्रुओं का दिवाला निकाला था।
सबसे महत्त्वपूर्ण थी 5140 चोटी उसे पाक सेना से मुक्त करवाया था।
सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर, 20 जून को कारनामा कर दिखाया था।
ये दिल माँगे मोर वे कहते थे बार-बार यही उदघोष उनके दिल मे समाया था।
5140 चोटी को जब वे फतह किये,सेना से कोड नाम शेरशाह पाया था।
अगले दिन 4875 वीं चोटी पर, विक्रम बत्रा ने तिरंगा फहराया था।
कायर पाकिस्तानी हथियार छोड़ भाग चले, रण में कालदूत विक्रम बली आया था।
7 जुलाई को लड़ाई के ही दौरान घायल अवस्था मे लेफ्टिनेंट नवीन थे।
उनको बचाने को दौड़े थे आप और छाती में गोली खाये तीन-तीन थे।
अंतिम उद्घोष जय माता दी कहके भारत का दुलारा विक्रम वीरगति पाई थी।
शौर्य, साहस, वीरता की अनुपम मिशाल बन भारत माता के चरणों मे ज्योति ये समाई थी।
या लहराते तिरंगे के पीछे आऊँ
या तो तिरंगे में लिपटा हुआ आऊँगा
पर आऊंगा जरूर जरूर मैं आऊँगा ।।
15 अगस्त सन उन्नीस सौ निन्यानबे, मरणोपरांत परमवीर
चक्र पाए थे।
ऑपरेशन विजय का परम विजेता वीर तिरंगे को मान को आप बढ़ाये थे।
रचयिता
राजकुमार शर्मा,
प्रधानाध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय चित्रवार,
विकास खण्ड-मऊ,
जनपद-चित्रकूट।

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