आशाएँ
जब बढ़ने लगे ताने
इस दुनिया के उलाहने
जब रहने लगे मन उदास
हर कदम पर उठने लगे सवाल
जब हो जाओ अनुत्तरित
ना हो कोई जवाब
तो बंद करके आँखें
करो अपनी क्षमताओं को याद
असंभव को संभव
तुम्हीं ने बनाया था
तुम्हारी शक्तियों ने भी
तुम्हे आजमाया था
ठान लेना कि कभी
हारना नहीं है
जीतना ही विकल्प था
जीतना ही विकल्प है
कभी ना होना हताश
कभी ना होना निराश
प्रयत्न सदा करना
सफलता रहेगी तुम्हारे आसपास
रचयिता
मृदुला वैश्य,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मीठाबेल,
विकास खण्ड-ब्रह्मपुर,
ज़िला-गोरखपुर।
इस दुनिया के उलाहने
जब रहने लगे मन उदास
हर कदम पर उठने लगे सवाल
जब हो जाओ अनुत्तरित
ना हो कोई जवाब
तो बंद करके आँखें
करो अपनी क्षमताओं को याद
असंभव को संभव
तुम्हीं ने बनाया था
तुम्हारी शक्तियों ने भी
तुम्हे आजमाया था
ठान लेना कि कभी
हारना नहीं है
जीतना ही विकल्प था
जीतना ही विकल्प है
कभी ना होना हताश
कभी ना होना निराश
प्रयत्न सदा करना
सफलता रहेगी तुम्हारे आसपास
रचयिता
मृदुला वैश्य,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मीठाबेल,
विकास खण्ड-ब्रह्मपुर,
ज़िला-गोरखपुर।

वाह बहुत खूब , उत्साह वर्धक ।
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteबहुत सुंदर मैम
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