बेटी

आज हर किसी को बेटे की चाहत है,
क्यों नहीं बेटी हमारे दिल की राहत है????
बेटी न तो पराया धन है,
और न  ही बेटी बोझ  है....
बेटी तो वो अनमोल रत्न है,
जो कराती दो परिवारों का  सुगम मिलन है....
आज अगर बेटी को तुम अगर गर्भ  मे ही मरवाओगे,
तो कल तुम अपना वंश  कैसे आगे बढ़ाओगे....
आज हमारी यही विनती है,
हर इंसान से....
बेटियों  को भी जीवन दान दे दो...
उनके स को भी लम्बी उड़ान दे दो.....

रचयिता
वन्दना गुप्ता,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय विशेषरपुर,
विकास क्षेत्र-भदपुरा,
जनपद-बरेली।

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