तुम कितना सीख गए हो

मुझे ताज्जुब नही होता
पर हाँ, मेरी आँखें नम हो जाती हैं
मेरी आँखें नम हो जाती हैं
क्योंकि मैं तुम्हारा कुम्हार हूँ
और तुम मेरे घड़े हो न!!
इसलिये
ख़ुशी से आँखें भर जाती हैं
ख़ुशी इसलिए
क्योंकि तुम जल्दी-जल्दी
कितना कुछ सीख गए
तुम सीख गए खुद से ही आयोजन करना
तुम्हें अब पता है की तैयारियाँ कैसे करनी हैं
बात ये नहीं है कि तुमने रंगीन गुब्बारे सजाये
या तुम सब थोड़ा-थोड़ा जोड़कर
कहीं से केक भी ले आये
बात ये है
कि ज़िन्दगी में तुम्हें गुणा भाग और जोड़ घटाने की पढ़ाई में
अचानक कितना बड़ा कर दिया
की ज़िन्दगी में तुम खुशियाँ जोड़ना सीख गए
अपने साथियों के साथ मिलकर
काम को भाग देना सीख लिया
और
अपने ही गुरूओं का काम घटाकर
तुमने ज़िन्दगी की तमाम सीख में अचानक
कई गुना गुणा कर दिया

मैं तुम्हारा कुम्हार सही
ये मानता हूँ कि तुम्हें मैं अब भी
थपकियाँ दूँगा
थोड़ी और ताप देना बाकी है तुम्हें
और पकना बाकी है तुम्हारा
ताकि ज़िन्दगी के बाज़ार में
जब तुम आगे बढ़ो
तो लोग तुम्हे ठोंक बजाकर
तुम्हे खरा पाएँ

मेरी यही दुआ है
और कोशिश यही
तुम जब भी मिलना
उस भरी गगरी सा मिलना
जिसमें गाम्भीर्य हो
अपने भरे होने का..

और हाँ
आज तुमने जो भी किया
मैं गर्व से कहूँगा
तुमने मुझसे बेहतर किया
क्योंकि तुम्हारे हर एक प्रयास में
एक खटमीठा सा
...उछाह है

जहाँ रहो
चमकते रहो
खूब पढ़ो, आगे बढ़ो..

रचयिता
यशोदेव रॉय,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय नाउरदेउर,
विकास खण्ड-कौड़ीराम, 
जनपद-गोरखपुर।

Comments

  1. वाह बहुत खूब ,हमेशा की तरह शानदार ।

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  2. Sir kya khate hai jo intna mitha likhte hai ap.

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  3. Sir kya khate hai jo intna mitha likhte hai ap.

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