क्रन्तिवीर दिनेश गुप्त

क्रन्तिवीर दिनेश गुप्त
जन्मदिवस 6 सितम्बर 1911

जन्म हुआ था पूर्वी सेमलिया
वर्तमान में बंग्लादेश।

स्वातन्त्र्य समर का अमर वीर
नाम था जिनका गुप्त दिनेश।।

भारत माता के चरणों में
वह शीश चढ़ाने वाला था।

क्रांति की ज्योति जलाकर के
ज्वाला भड़काने वाला था।

बंगाल जेल का महानिरीक्षक
एन.एस.सिम्पसन अत्याचारी था।

क्रांतिवीरों को सताने की
करता रहता तैयारी था।

उस क्रूर विधर्मी अन्यायी
को सबक सिखाने की ठानी।

सुधीर विनय के संग चला
दिनेश ने रखी सावधानी।

राइटर्स बिल्डिंग में बैठा था
सिम्पसन चपरासी के संग में।

धृष्टता, क्रूरता टपक रही
अभिमानी के हर अंग-अंग से।

तीनों ने अंदर घुस करके
छः गोली मारी छाती में।

अंत हुआ अन्यायी का
सिम्पसन लुढ़का था धरती में।।

तीनों तब जान बचाने को
भाग चले उस प्रांगण में।

कमरे में खुद को बंद किया
औ भिड़ गए फिर समरांगण में।

चहुँओर पुलिस ने घेर लिया
और होने लगी गोलीबारी।

दिनेश बन गया मतवाला
कुर्बानी की कर ली तैयारी।

कारतूस थे सारे खत्म हुए
कनपटी पे गोली खुद मारी।

भारत के वीर शहीद हुआ
सुधीर, बड़ा क्रन्तिकारी।

विनय, दिनेश को पकड़ लिया
अस्पताल में दवा कराई थी।

7 जुलाई  1931 को
दिनेश ने फाँसी पायी थी।

बस दिवस 20 दिन बीते थे
कन्हाई लाल भट्टाचारी।

न्यायालय में घुस उसने
उस जज को थी गोली मारी।

क्रांति के अमर शहीदों का
प्रतिशोध लिया कन्हाई ने।

सर्वस्व न्यौछावर कर बैठे
स्वाधीनता की लड़ाई में।।

रचयिता
राजकुमार शर्मा,
प्रधानाध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय चित्रवार,
विकास खण्ड-मऊ,
जनपद-चित्रकूट।

Comments

  1. इसमें दिनेश को फांसी की सजा हुई थी

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  2. वीनू ने दवाई खाने से मना कर दिया और अस्पताल मे उसकी मौत हो गयी यही

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