विद्यालय की व्यथा
आओ सुनाऊँ तुम्हें अपनी व्यथा,
महामारी काल की यह लंबी कथा।
अपने बाप-दादा से कभी न सुनी ऐसी बात,
कैसे बिताए इस दौरान मैंने दिन व रात।
मेरे दिल के टुकड़ों! मेरी आँखों के नूर!
अब तुम रहो न मुझसे इतनी दूर।
मेरे प्यारे बच्चो! अब आ भी जाओ।
मेरे राज दुलारो! एक झलक दिखा भी जाओ।।
तुम्हारी मधुर आवाज से होता था भोर,
कोविड-19 में किसी का न चल पाया जोर।
घंटी व ड्रम से बजता था संगीत,
सुंदर पोशाक में गाते थे तुम गीत।
आँखें बिछाए, बाहें फैलाए कब से खड़ा हूँ,
सर्दी, गर्मी, बरसात में यूँ ही पड़ा हूँ।
मेरे प्यारे बच्चों! अब आ भी जाओ।
मेरे राज दुलारो! एक झलक दिखा भी जाओ।।
मेरी बगिया के फूलों ने खिलना छोड़ दिया है,
चहचहाते पक्षियों ने अपना पथ मोड़ दिया है।
दीवारों पर बने चित्रों ने चिढ़ाना छोड़ दिया है,
लगता है अब तुमने भी नाता तोड़ दिया है।
कब महामारी के बादल हटेंगे, होगी खुशियों की बरसात,
मैया शारदे! कभी ना आए, ऐसी अंधेरी रात।
मेरे प्यारे बच्चो! अब आ भी जाओ,
मेरे राज दुलारो! एक झलक दिखा भी जाओ।
छँट जाएँगे बादल, मिटेंगी अंधेरी रातें,
अब जी भरकर करूँगा मैं ढेर सारी बातें।
राह देख-देख बारहों मास आँखें रहीं नम,
मेरे लाल! पठन-पाठन हो गया है कम।
हमें अब रखना होगा- एक-दूसरे पर विश्वास,
पूरी करोगे तुम माता-पिता व गुरु की आस।
मेरे प्यारे बच्चो! अब आ भी जाओ।
मेरे राजदुलारो! एक झलक दिखा भी जाओ।
रचयिता
नीता अल्मिया,
प्रधानाध्यापिका,
राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय पिंगलो,
विकासखण्ड- गरुड़,
जनपद-बागेश्वर,
उत्तराखण्ड।

Op Nita mam Aman
ReplyDeleteOp I'm prakash ❤️❤️❤️👍👍👍👍☺️☺️☺️💝💝💝✅✅✅🥰🙏🙏🥰🥰🙏🙏🙏❤️❤️❤️
ReplyDelete🙏👍🌻very nice mem ।।
ReplyDeleteAradhya bisht
DeleteMam Bhumika and Rituraj:-Mam no words to express that how beautiful this poem is.........❤
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