संग्रहालय
धरोहरों को संजोती
देवालय में देवमूर्ति सी।
जीवित रहती पुरा स्मृति,
संग्रहालय में नूतन सी।
कहीं सजे हैं पग के घुंघरू,
रंगशाला की छवि जतलाते।
संग योद्धाओं की तलवारें,
गाथाएँ रणभूमि की बतलाते।
तोपें सजी, कहीं वाद्ययंत्र,
सुनाते युद्ध और संगीत के मंत्र।
कहीँ सुशोभित धर्मग्रन्थ,
बतलाते हमको जीवन मंत्र।
टूटे-फूटे पात्र धरे,
कहीं सजे हैं आभूषण।
आदिकाल से बने हैं,
संग्रहालय के आकर्षण।
राजा की पोशाकें,
राज वैभव दिखती।
मुकुट चमके कहीं,
सम्राटों का आभास कराती।
कहीं झुके हैं आदि पाषाण,
बोल रहे जैसे भाषण।
दीवारों पर टकी चित्रकारी,
सब मन मार रही पिचकारी।
गाथाओं के शंख नाद सुनाते,
पौराणिक युद्ध सा।
इतिहास और अतीत का,
हर क्षण संग्रहालय में जीवित सा।
रचयिता
सन्नू नेगी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय सिदोली,
विकास खण्ड-कर्णप्रयाग,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।
देवालय में देवमूर्ति सी।
जीवित रहती पुरा स्मृति,
संग्रहालय में नूतन सी।
कहीं सजे हैं पग के घुंघरू,
रंगशाला की छवि जतलाते।
संग योद्धाओं की तलवारें,
गाथाएँ रणभूमि की बतलाते।
तोपें सजी, कहीं वाद्ययंत्र,
सुनाते युद्ध और संगीत के मंत्र।
कहीँ सुशोभित धर्मग्रन्थ,
बतलाते हमको जीवन मंत्र।
टूटे-फूटे पात्र धरे,
कहीं सजे हैं आभूषण।
आदिकाल से बने हैं,
संग्रहालय के आकर्षण।
राजा की पोशाकें,
राज वैभव दिखती।
मुकुट चमके कहीं,
सम्राटों का आभास कराती।
कहीं झुके हैं आदि पाषाण,
बोल रहे जैसे भाषण।
दीवारों पर टकी चित्रकारी,
सब मन मार रही पिचकारी।
गाथाओं के शंख नाद सुनाते,
पौराणिक युद्ध सा।
इतिहास और अतीत का,
हर क्षण संग्रहालय में जीवित सा।
रचयिता
सन्नू नेगी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय सिदोली,
विकास खण्ड-कर्णप्रयाग,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

संग्रहालयों को दर्शाती बेहतरीन कविता👌👌👌👌
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