सोचा न था

माँ के दुलार को प्यार कहते थे हम कभी
एक दिन वो कहने लगे हमें तुमसे प्यार है
तड़प, जूनून और रुसवाईयाँ भी होती हैं प्यार में
कभी ऐसा सोचा न था

एक दिन ऐसा भी आएगा
चाहत के बदले दर्द मिलेगा
बदले में ऐसा भी होता है
कभी ऐसा सोचा न था

नाज़ था हमें जिन पर
वही नजरों से गिराएँगे
बचपन की ठोकरों से
कभी ऐसा सोचा न था

कहते हैं लोग, प्यार है अगर सच्चा
एक दिन लौटकर आएगा
उन्हें नफरत भी ना रहेगी हमसे
कभी ऐसा सोचा न था

गिरगिट को रंग बदलते देखा था हमने
प्यार निभाने की कसमें खायी थीं जिन्होंने
वो भी इतना बदल जाएँगे
कभी ऐसा सोचा न था

प्यार सब कुछ नहीं होता
ऐसा सुना था मैंने
मेरा सब कुछ वही हो जाएगा
कभी ऐसा सोचा न था

सच है, सोचो कुछ और होता है कुछ
बदलते वक्त की धुरी के साथ
अपनी भी सोच बदलनी पड़ जाएगी
कभी ऐसा सोचा न था

रचयिता
अरूणा कुमारी राजपूत,
सहायक अध्यापक,
आदर्श अंग्रेजी माध्य्म संविलयन विद्यालय राजपुर,
विकास खण्ड-सिंभावली, 
जिला-हापुड़।

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