दूर संचार क्रांति

पत्रों  का जब जन्म हुआ,
पक्षी  जिम्मेदारी से मुक्त हुआ।
उन्मुक्त गगन में उड़ने लगा,
तराने आजादी के गाने लगा।

पत्रों ने जब कदम आगे बढ़ाया,
टेलीग्राम से  हाथ  मिलाया।
झट से सन्देशा पहुँचाया,
सब के मन को यह भाया।

टेक्नोलॉजी ने  कमाल  दिखाया,
फिर टेलीविज ने करतब दिखाया।
घर बैठे  सारा  हाल  सुनाया,
सन्देशा घर- घर  पहुँचाया

संचार के साधन अनेक,
अख़बार, फैक्स, इंटरनेट भी एक।
मोबाइल ने खूब जमायी,
अपने अंदर कई खूबी लायी।

इंटरनेट आज  सुगम साधन,
सबके  काम हो गए आसान।
मुट्ठी  में  सारा जहां  समाये,
सात  समुद्र  एक  कराये।

पल -पल की खबर ये लाये,
देश दुनिया की बात कराये।
राष्ट्र को आर्थिक प्रगति कराये,
 संचार की दुनिया में क्रांति लाये।

17 मई विश्व संचार दिवस मनाएँ,
नई प्रौद्योगिकी की जागरूकता लाएँ।
सामाजिक विकास का  परिवर्तन लाएँ,
दुनिया क़े कदम से कदम मिलाएँ।

रचयिता
सन्नू नेगी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय सिदोली,
विकास खण्ड-कर्णप्रयाग, 
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

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