नवांकुर
धरा हो उस बगिया की माँ तू,
जिस बगिया की मैं अंकुर हूँ।
मैं उत्सुक हूँ, विकसित हो,
उस बगिया में आने को,
हरित पल्लवित पुष्पलता बन,
तेरी बगिया महकाने को।
पर मुझको भय सता रहा,
कुरीति-परस्ती जता रहा।
लौह-यंत्र वार से मुझे कुंद कर,
माँ-कोख धरा से अलग-थलग कर,
कचरे में ना फेंकी जाऊँ।-2
ऐ मेरी ममतामई माँ, तू ऐसा होने से रोक--
तू टोक उसे जो करने को रहा हो ऐसा सोच
ताकी मैं भी उस दुनिया में आ पाऊँ,
नवांकुर से हरित-लता बन,
तेरी बगिया में छा जाऊँ। 2
मैं तुझसे वादा करती माँ,
हूँ खुद में साहस भरती माँ,
नहीं बनूँगी बोझ किसी पे,
मैं तन-मन से मेहनत कर के,
सूखा, धूप, छाँव सह करके,
चोटी पर लाहराऊँगी।
तेरी बगिया का गौरव बन,
जग में नाम कमाऊँगी। 2
पहले जग में मुझे आने तो दे,
फिर करके इसे दिखाऊँगी।
रचयिता
विजय मेहंदी,
सहायक अध्यापक,
KPS(E.M.School) शुदनीपुर,
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।
जिस बगिया की मैं अंकुर हूँ।
मैं उत्सुक हूँ, विकसित हो,
उस बगिया में आने को,
हरित पल्लवित पुष्पलता बन,
तेरी बगिया महकाने को।
पर मुझको भय सता रहा,
कुरीति-परस्ती जता रहा।
लौह-यंत्र वार से मुझे कुंद कर,
माँ-कोख धरा से अलग-थलग कर,
कचरे में ना फेंकी जाऊँ।-2
ऐ मेरी ममतामई माँ, तू ऐसा होने से रोक--
तू टोक उसे जो करने को रहा हो ऐसा सोच
ताकी मैं भी उस दुनिया में आ पाऊँ,
नवांकुर से हरित-लता बन,
तेरी बगिया में छा जाऊँ। 2
मैं तुझसे वादा करती माँ,
हूँ खुद में साहस भरती माँ,
नहीं बनूँगी बोझ किसी पे,
मैं तन-मन से मेहनत कर के,
सूखा, धूप, छाँव सह करके,
चोटी पर लाहराऊँगी।
तेरी बगिया का गौरव बन,
जग में नाम कमाऊँगी। 2
पहले जग में मुझे आने तो दे,
फिर करके इसे दिखाऊँगी।
रचयिता
विजय मेहंदी,
सहायक अध्यापक,
KPS(E.M.School) शुदनीपुर,
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।

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