डिजिटल एजुकेशन

वक़्त बहुत तेज़ी से बदला, हुआ दीर्घ परिवर्तन,
शिक्षा रूप बदलकर बन गई, डिजिटल एजुकेशन।

समय घटा है, रुचि बढ़ी है, उच्च हुआ है शिक्षण,
शिष्य, गुरु दोनों मन भाया डिजिटल एजुकेशन।

नहीं बाध्यता रही जगह की, पढ़ो जहाँ भी हो मन,             
घर तक आया ऑनलाइन अब, डिजिटल एजुकेशन।

तकनीकी ने शिक्षा को, उपहार किया ये अर्पण,
परिपूर्ण है, गुणवत्ता से, डिजिटल एजुकेशन।

नहीं कमी, अब शेष कोई भी, मन का करो समर्पण,
राह खोलता, अम्बर तक की, डिजिटल एजुकेशन।

डस्टर, चाक, बोर्ड का मन में, नहीं रहा अब चिंतन,
शिक्षा का बदला स्वरूप है, डिजिटल एजुकेशन।

ज्ञान क्षेत्र का बढ़ा दायरा और बढ़ा विद्या धन,
लर्निंग स्किल बढ़ा रही है, डिजिटल एजुकेशन।

नहीं डाँट टीचर की पड़ती, न कक्षा की अनबन,
इसीलिए सबको भाती ये, डिजिटल एजुकेशन।

रचयिता
कपिल जैन,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय ताहरपुर,
विकास क्षेत्र-नजीबाबाद,
जनपद-बिजनौर।

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