अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस
सन् 1977 में हुई अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय की शुरुआत,
18 मई को प्रारंभ हुआ इसका इतिहास।
दुनिया के संग्रहालय अपने देश में आयोजन कराते,
जागरूकता फैलाने को, कार्यक्रम कई बताते।
2000 में भाग लिया, 90 से ज्यादा देशों ने,
संग्रहालय दिवस में भागीदारी की 20000 संग्रहालयों ने।
बढ़ते-बढ़ते 2011 में देश हुए सौ,
2012 में संख्या पहुँच गई उनतीस और सौ।
आएकॉम इस खास दिवस पर विशेष कार्यक्रम करता,
इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ museum पूरा नाम होता।
उद्देश्य समाज को महत्व से अवगत कराना है,
संग्रहित वस्तुओं से दुनिया को आकृष्ट करेयाना है।
राजनैतिक शक्ति नहीं पर शक्तिशाली होता,
राजनैतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर लेता।
अगर ना होते संग्रहालय, इतिहास कौन बताता,
जयपुर के museum में महाराणा प्रताप कौन दिखाता।
प्रयुक्त भाला और बख्तर वहाँ कौन रख जाता,
वजनदार तलवारों का ज्ञान कौन करवाता।
पुरातन संस्कृति और इतिहास को जीवटता देता,
संयुक्त राष्ट्र संघ ने 18 मई 1983 बताई इसकी महत्ता।
आओ मिलकर शपथ लें और जागरूकता फैलाएँ,
सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण का बेड़ा उठाएँ।।।
18 मई को प्रारंभ हुआ इसका इतिहास।
दुनिया के संग्रहालय अपने देश में आयोजन कराते,
जागरूकता फैलाने को, कार्यक्रम कई बताते।
2000 में भाग लिया, 90 से ज्यादा देशों ने,
संग्रहालय दिवस में भागीदारी की 20000 संग्रहालयों ने।
बढ़ते-बढ़ते 2011 में देश हुए सौ,
2012 में संख्या पहुँच गई उनतीस और सौ।
आएकॉम इस खास दिवस पर विशेष कार्यक्रम करता,
इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ museum पूरा नाम होता।
उद्देश्य समाज को महत्व से अवगत कराना है,
संग्रहित वस्तुओं से दुनिया को आकृष्ट करेयाना है।
राजनैतिक शक्ति नहीं पर शक्तिशाली होता,
राजनैतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर लेता।
अगर ना होते संग्रहालय, इतिहास कौन बताता,
जयपुर के museum में महाराणा प्रताप कौन दिखाता।
प्रयुक्त भाला और बख्तर वहाँ कौन रख जाता,
वजनदार तलवारों का ज्ञान कौन करवाता।
पुरातन संस्कृति और इतिहास को जीवटता देता,
संयुक्त राष्ट्र संघ ने 18 मई 1983 बताई इसकी महत्ता।
आओ मिलकर शपथ लें और जागरूकता फैलाएँ,
सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण का बेड़ा उठाएँ।।।
रचयिता
नम्रता श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,

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